बिहार के प्रसिद्ध मगही पान को GI टैग मिलने के बाद किसानों को काफी फायदा मिला है। मगही पान को उसकी खास क्षेत्रीय पहचान और विशिष्ट गुणवत्ता के लिए 28 मार्च 2018 को आधिकारिक तौर पर जीआई टैग दिया गया था। इस खास पहचान और सरकारी कदमों से मगही पान के बाजार मूल्य में भारी उछाल आया है।
बाजार में दाम हुए दोगुने से अधिक
किसानों और बाजार की रिपोर्ट के अनुसार, जीआई टैग मिलने से पहले मगही पान की एक ढोली (200 पत्ते) का भाव 120 से 140 रुपये के बीच मिलता था। लेकिन जीआई पहचान और बेहतर मूल्य श्रृंखला बनने के बाद, अब यही पान वाराणसी और गया के बाजारों में 280 से 300 रुपये प्रति ढोली (200 पत्ते) के भाव पर बिक रहा है। पान उत्पादक किसानों ने खुद इन बाजारों में इस बढ़े हुए दाम की पुष्टि की है।
1,001 अधिकृत किसान और अपनी कंपनी का गठन
जानकारी के अनुसार, नवादा और नालंदा जिले के 1,001 किसान अब मगही पान के GI अधिकृत किसान (GI Authorised Farmers) बन चुके हैं। इस पहचान को सामूहिक ताकत में बदलने के लिए किसानों को एकजुट किया गया। किसानों को संगठित करने में श्री शिव शंकर कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप 'रेणु एंड राजेंद्र मगही पान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' (FPC) का गठन हुआ। इससे किसान एकजुट होकर सीधे बाजार से जुड़ सके।
ICAR-DMAPR ने दिया तकनीकी और सांगठनिक सहयोग
मगही पान के इस सफर को सफल बनाने में आनंद (गुजरात) स्थित आईसीएआर - औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DMAPR) ने विज्ञान को खेत तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान ने चार मुख्य स्तरों पर किसानों का सहयोग किया, जिनमें जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण, पंजीकरण में सहायता और सामूहिक जुड़ाव शामिल है।