विज्ञापन
Home Khabar Junction India Aims To Reach A Silk Production Of 60 000 Tonnes By 2030 31 And Is Gearing Up To Become The Number One P

Silk Production: भारत का रेशम उत्पादन 2030-31 तक 60,000 टन करने का लक्ष्य, 2028-29 तक नंबर-1 बनने की तैयारी...

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 22 Sep 2026 09:54 AM IST
सार

  • केंद्र सरकार ने 2030-31 तक देश में 60,000 टन रेशम उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
  • 2028-29 तक भारत को दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • देश का रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 टन से बढ़कर करीब 42,000 टन पहुंच गया है।
  • शहतूत की पैदावार, कोकून पालन और आधुनिक तकनीक के जरिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर है।
  • कर्नाटक देश में रेशम उत्पादन में आगे है, जबकि सरकार MSME के जरिए उद्यमियों को सहायता दे रही है।

रेशम उत्पादन में नंबर वन बनने पर भारत का फोकस।
रेशम उत्पादन में नंबर वन बनने पर भारत का फोकस। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने देश में रेशम उत्पादन को साल 2030-31 तक बढाकर 60,000 टन करने का बडा लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही, भारत को साल 2028-29 तक पूरी दुनिया में रेशम उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। यह बात केंद्रीय कपडा मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार को बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) के 77वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान कही।

उत्पादन में भारी बढोतरी और किसानों की आमदनी बढाने की योजना
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अनुसार, देश में रेशम का उत्पादन साल 2014 के 26,000 टन से बढाकर अब 42,000 टन तक पहुंच चुका है। सरकार देश के रेशम उद्योग के विस्तार और किसानों की आर्थिक तरक्की के लिए पूरी तरह समर्पित है। मंत्री ने बताया कि शहतूत की पत्तियों की पैदावार बढाकर और कोकून पालन के चक्र को तेज करके 2030-31 तक 60,000 टन रेशम उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इस योजना के जरिए किसानों की सालाना आमदनी को 10 लाख से 12 लाख रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

वैश्विक मांग और 300 अरब डॉलर के कपडा बाजार का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वैज्ञानिकों के नए अनुसंधान, हाइब्रिड किस्में और आधुनिक मशीनें सीधे किसानों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ऐसे समय में जब चीन का उत्पादन घट रहा है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग लगातार बढ रही है। आधिकारिक बयान के अनुसार, रेशम कीट पालन से लेकर धागा बनाने और बुनाई तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत करके देश के कपडा बाजार को 300 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इसी कार्यक्रम में कपडा मंत्रालय की संयुक्त सचिव (रेशम) और सीएसबी की उपाध्यक्ष पद्मिनी सिंगला ने भी रेशम क्षेत्र की रणनीतिक प्रगति पर बात करते हुए 2030-31 तक 60,000 टन उत्पादन के लक्ष्य को दोहराया।

कर्नाटक की अगुवाई और एमएसएमई योजनाओं का सहयोग
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कर्नाटक देश के रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर है। सरकार इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निर्यात के मानकों वाला रेशम बनाने पर जोर दिया जा रहा है जिससे घरेलू उत्पादन बढेगा और विदेशों से आयात पर निर्भरता काफी कम होगी। बयान के अनुसार, बडी संख्या में उद्यमी एमएसएमई के तहत अपना पंजीकरण करा रहे हैं, जिन्हें सब्सिडी और गुणवत्ता सुधार योजनाओं के माध्यम से लगातार सहायता दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और रेशम व कपडा उद्योग में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।


विज्ञापन
विज्ञापन