विज्ञापन
Home Khabar Junction Volatility Likely In The Edible Oil Market Sea Warns Government About Global Supply Crisis

Edible Oil: खाद्य तेल बाजार में बढ़ सकती है हलचल, SEA ने सरकार को वैश्विक सप्लाई संकट को लेकर किया आगाह

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 22 Sep 2026 09:58 AM IST
सार

  • SEA ने वैश्विक कारणों से आने वाले महीनों में खाद्य तेल बाजार में अस्थिरता की आशंका जताई।
  • अल नीनो, रूस-यूक्रेन संघर्ष और इंडोनेशिया के B50 कार्यक्रम से वनस्पति तेल बाजार प्रभावित हो सकता है।
  • नेपाल से जीरो-ड्यूटी खाद्य तेल आयात के जांच की मांग उठी।

खाद्य तेल बाजार में अस्थिरता की आशंका
खाद्य तेल बाजार में अस्थिरता की आशंका - फोटो : AI Image
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने नई दिल्ली में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर वैश्विक खाद्य तेल बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर आगाह किया है। एसईए के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने सदस्यों को लिखे अपने मासिक पत्र में बताया कि एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा से मुलाकात की। इस दौरान देश में खाद्य तेल के मौजूदा स्टॉक और सप्लाई की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी गई।

वैश्विक कारणों से बदल सकता है तेल बाजार का संतुलन
एसईए के अनुसार, आने वाले दिनों में खाद्य तेल के बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। अल नीनो का संभावित असर, रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में बनी अनिश्चितता और इंडोनेशिया का B50 बायोडीजल कार्यक्रम मिलकर वैश्विक वनस्पति तेल के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

संजीव अस्थाना के अनुसार, इन वैश्विक परिस्थितियों की वजह से आने वाले महीनों में सोयाबीन और सोयाबीन तेल की रणनीतिक अहमियत काफी बढ़ सकती है।

डीओआरबी नीति और 5% जीएसटी की सिफारिश
प्रतिनिधिमंडल ने उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे से भी मुलाकात कर उद्योग से जुड़ी अहम समस्याएं रखीं। इनमें डी-ऑयल्ड राइस ब्रान (DORB) की नीतिगत अनिश्चितता का मुद्दा प्रमुख रहा।

एसईए अध्यक्ष ने बताया कि डीओआरबी निर्यात पर पहले लगी पाबंदियों के कारण कई प्रोसेसिंग यूनिट बंद हो गई थीं या उनका कामकाज घट गया था। नीतिगत स्पष्टता न होने से नए निवेश पर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही, एसोसिएशन ने डीओआरबी को 5 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में लाने की सिफारिश की है ताकि देश के भीतर चावल की भूसी से तेल निकालने को बढ़ावा मिल सके।

चीन को निर्यात के मौके और नेपाल से आयात पर चिंता
एसईए के अनुसार, भारत से चीन को रेपसीड (सरसों) का निर्यात एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। हालांकि, चीन के सीमा शुल्क प्रशासन (GACC) में पंजीकरण की प्रक्रिया धीमी होने के कारण अभी केवल पांच भारतीय निर्यातक ही पंजीकृत हो पाए हैं। इस मामले को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के सामने उठाया गया है, जो जल्द ही चीनी अधिकारियों से बात करेगा।

वहीं, नेपाल से साफ़्टा (SAFTA) समझौते के तहत शून्य शुल्क (जीरो-ड्यूटी) पर आने वाले खाद्य तेल को लेकर भी चिंता जताई गई है। एसईए ने स्पष्ट किया कि उन्हें वैध व्यापार से आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना टैक्स वाले आयात से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के स्थानीय बाजारों में भारी असंतुलन पैदा हो रहा है।

एसोसिएशन ने सरकार को सुझाव दिया है कि इसके लिए कोटा तय किया जाए, न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) लागू हो और सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन की कड़ी जांच की जाए, ताकि छूट का लाभ केवल असल में नेपाल में बने उत्पादों को ही मिल सके।


विज्ञापन
विज्ञापन