महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने सोमवार को बताया कि भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार जल्द ही राज्य में 100 प्रतिशत सूखा घोषित करेगी। मंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि के नियमों के आधार पर सितंबर के अंत तक सूखे की यह घोषणा होने की उम्मीद है।
फसलों की भारी बर्बादी और राहत के कदम
संकट की गंभीरता पर बोलते हुए पाटिल ने कहा, मैंने अपने पूरे जीवन में इतना भयंकर सूखा कभी नहीं देखा है।" उन्होंने बताया कि बारिश न होने के कारण सोयाबीन, कपास और गन्ने सहित सभी फसलों को भारी नुकसान हुआ है और किसानों की बहुत बड़ी क्षति हुई है।
मंत्री के अनुसार, सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए कई कदम पहले ही शुरू कर दिए हैं। इनमें छात्रों की फीस माफी, बिजली बिल की माफी और पानी के टैंकर भेजना शामिल है।
यह बयान इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी मंत्री ने 100% सूखा घोषित करने की बात कही है। अब तक सरकार का आधिकारिक रुख यही था कि 5 अक्तूबर के बाद ही फसलों के नुकसान का सर्वेक्षण और जमीनी जांच की जाएगी।
कई जिलों में बारिश की भारी कमी
राज्य के कई इलाके लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। राज्य कृषि विभाग के अनुसार, 20 जिलों की कम से कम 83 तहसीलों में 20 दिनों से अधिक समय से बारिश ही नहीं हुई है। अमरावती, सोलापुर और लातूर सहित कम से कम छह जिलों में बारिश में 40-50% की कमी दर्ज की गई है। पानी की किल्लत के कारण धाराशिव जिले के नाइचाकूर जैसे गांवों में पानी के टैंकर पहुंचने लगे हैं।
जल स्रोतों को फिर से जिंदा करने के निर्देश
पानी के इस संकट को देखते हुए, राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासनों को निर्देश दिया है कि वे पानी के टैंकरों को ही पहला समाधान मानने के बजाय, पुराने जल स्रोतों को फिर से चालू करें और कमी वाले गांवों में पानी सप्लाई का नेटवर्क बनाएं।
राज्य मृदा एवं जल संरक्षण विभाग द्वारा 16 सितंबर को जारी एक सर्कुलर के अनुसार, भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी उन गांवों की पहचान करेगी जहां पीने के पानी की कमी है। यह एजेंसी अक्टूबर तक जिला कलेक्टरों को अपनी सूची सौंपेगी। इसके बाद कलेक्टरों को अलग-अलग समय के लिए योजनाएं बनानी होंगी। सरकार के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर की अवधि के लिए 15 नवंबर तक योजनाएं जमा करनी होंगी। इसके बाद, जनवरी-मार्च 2027 के लिए 20 दिसंबर तक और अप्रैल-जून 2027 के लिए 20 जनवरी तक योजनाएं सौंपनी होंगी।
केंद्र के भरोसे नहीं बैठेगी सरकार: मुख्यमंत्री
इसी बीच, सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार कम बारिश से परेशान किसानों की मदद के लिए केंद्र की सहायता का इंतजार नहीं करेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, नियमों के तहत 5 अक्तूबर के बाद फसलों के नुकसान का औपचारिक आकलन किया जाएगा, जिसके बाद राज्य सरकार केंद्र से मदद मांगेगी।