पशुधन बीमा योजना के तहत किसानों को देना होगा सिर्फ 15% प्रीमियम; गाय-भैंस, भेड़-बकरी और ऊंट के लिए मिलेगा बीमा का लाभ, जानें आवेदन का तरीका।
पशुपालन में मवेशी की मौत एक बड़ा आर्थिक झटका होता है। इस झटके से बचने के लिए पशुपालक केंद्र सरकार की पशुधन बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं। खास बात यह है कि इस योजा के तहत काफी कम किस्त पर पशुओं का बीमा होता है, क्योंकि सरकार कुल किस्त का 85 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के तहत कवर करती है।
सरकार देती है 85% तक प्रीमियम सब्सिडी, राजस्थान में मुफ्त बीमा का प्रावधान
पशुधन बीमा योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान को पूरा प्रीमियम खुद नहीं भरना पड़ता। राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना के तहत सामान्य राज्यों में पशुपालक को केवल लगभग 15 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है, जबकि बाकी 85 प्रतिशत राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सब्सिडी का खर्च उठाती हैं। इससे किसानों पर बीमा का वित्तीय भार बेहद कम हो जाता है।
राजस्थान की मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में पात्र पशुपालकों को मुफ्त बीमा कवरेज देने का प्रावधान किया गया है। इसमें गाय-भैंस के साथ-साथ भेड़, बकरी और ऊंट जैसे पशुओं को भी शामिल किया जाता है।
गाय-भैंस पर 60 हजार और भेड़-बकरी पर 15 हजार रुपये तक की बीमा राशि
बीमा के तहत मिलने वाली रकम पशु की प्रजाति, नस्ल, उसकी कीमत और योजना के नियमों पर निर्भर करती है। गाय और भैंस के लिए करीब 40,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक का बीमा कवर दिया जाता है। बैल और ऊंट के लिए भी योजना के नियमों के अनुसार इसी स्तर का कवर उपलब्ध है। भेड़ और बकरी के लिए प्रति पशु लगभग 4,000 रुपये से 15,000 रुपये तक की बीमा राशि का प्रावधान है।
इसके साथ ही, अगर कोई बीमित पशु किसी कारणवश स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो कुछ योजनाओं में बीमा राशि के एक हिस्से का भुगतान किया जाता है, जो कुछ मामलों में 75 प्रतिशत तक हो सकता है।
कान का टैग अनिवार्य, ऐसे करें ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन
बीमा कराने से पहले पशुपालकों को पशु की पहचान और स्वास्थ्य से जुड़े कागजात दुरुस्त रखने होते हैं। पशु के कान में लगा 'टैग' सबसे अहम होता है, क्योंकि इसी से बीमित पशु की पहचान होती है और क्लेम के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र भी जरूरी होता है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए पशुपालक पशुधन बीमा पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, स्थानीय पशुपालन विभाग के कार्यालय या अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर भी आवेदन किया जा सकता है।