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कर्नाटक में सूखे की मार : 217 तालुका प्रभावित, 46 हजार करोड़ की फसल बर्बाद; केंद्र से मांगे 7142 करोड़

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 05 Oct 2026 06:55 PM IST
सार

कर्नाटक के 240 में से 217 तालुका सूखे की चपेट में हैं। राज्य सरकार के मुताबिक करीब 46 हजार करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुई है और केंद्र से 7,142.64 करोड़ रुपये की राहत मांगी गई है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कर्नाटक में सूखे का असर लगातार बढ़ रहा है। राज्य के 240 में से 217 तालुका सूखे की चपेट में आ गए हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक, सूखे से फसलों को करीब 46 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए केंद्र से 7,142.64 करोड़ रुपये की मदद मांगी है।

राज्य सरकार ने यह सहायता राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) के नियमों के तहत मांगी है। इससे पहले कर्नाटक ने केंद्र से 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। अब सूखे से हुए नुकसान का नया आकलन सामने आने के बाद राहत की मांग बढ़ाई गई है।

217 तालुका सूखे की चपेट में
कर्नाटक सरकार ने हाल ही में 40 और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इसके साथ ही सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या बढ़कर 217 हो गई है। यानी राज्य के करीब 90 फीसदी तालुका सूखे से प्रभावित हैं। राज्य सरकार के अनुसार, फसल नुकसान का ताजा अनुमान करीब 46,000 करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा पहले लगाए गए 46,324.50 करोड़ रुपये के अनुमान के आसपास ही है।

केंद्र की टीम कर रही नुकसान का आकलन
सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम 3 अक्टूबर से कर्नाटक के प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही है। टीम का तीन दिन का आकलन 6 अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है। टीम मौके पर सूखे की स्थिति देखेगी और राज्य के अधिकारियों से नुकसान से जुड़े आंकड़े जुटाएगी। इसके बाद केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से मिलने वाली राहत पर आगे फैसला हो सकता है।

किसानों की मदद जरूरी- शिवकुमार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि किसानों को नुकसान होने पर इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य के किसानों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा, “अगर किसान परेशान होते हैं तो सब कुछ ठप हो जाता है। इसलिए केंद्र सरकार को राज्य के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।”
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