मानसूनी बारिश में कमी के चलते महाराष्ट्र सरकार ने पानी की सप्लाई में 10 प्रतिशत कटौती करने का फैसला लिया है। यह कटौती नगर निगमों, नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायत स्तर पर लागू होगी। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि सरकार ने बांध और उपयोग के हिसाब से पानी के प्रबंधन का प्लान तैयार किया है, जिसमें पेयजल को सबसे पहली प्राथमिकता दी गई है।
पेयजल को प्राथमिकता, 31 अगस्त 2027 तक का प्लान तैयार
प्रदेश की 265 तहसीलों में सूखे का एलान कर दिया गया है। अल नीनो का असर 2027 में भी बने रहने के आसार हैं, ऐसे में पानी का सावधानी से इस्तेमाल और जल संरक्षण उपायों पर फोकस किया जा रहा है। जल प्रबंधन योजना के तहत जलाशयों और बांधों से पानी के वितरण में पीने के पानी की जरूरत को सबसे ऊपर रखा गया है। भाप बनकर उड़ना, गाद जमने और अवैध जल की निकासी को ध्यान में रखते हुए 31 अगस्त 2027 तक पीने के पानी को आरक्षित करने का फैसला लिया गया है। अगर मौजूदा स्थिति बहुत अधिक गंभीर होने पर तकनीकी जांत के बाद बांधों के डेड स्टोरेज का जल भी उपयोग में लाया जाएगा।
लीकेज रोकने के लिए खास अभियान और ट्रीटेड पानी का दोबारा उपयोग
निर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों को पानी की बर्बादी व लीकेज रोकने के लिए विशेष जांच अभियान चलाने को कहा गया है। इसके अलावा, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पूरी क्षमता से चलाए जाएंगे और साफ किए गए गंदे पानी (ट्रीटेड वेस्टवॉटर) का उपयोग बागवानी, निर्माण कार्यों और वाहनों व सड़कों की धुलाई में किया जाएगा।
उद्योगों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। सरकार के निर्देशानुसार, उद्योगों को अपने द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कुल पानी का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा दोबारा उपयोग (रीसाइकल या री-यूज) करना अनिवार्य होगा।
सबसे पहले रबी खाद्यान्न फसलों को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार के अनुसार, कृषि क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी तभी दिया जाएगा जब पेयजल, मवेशियों और चारे की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। सिंचाई के पानी के आवंटन का क्रम तय कर लिया गया है। सबसे पहले रबी खाद्यान्न फसलों और चारे की फसलों को प्राथमिकता मिलेगी। इसके बाद अन्य रबी फसलों को पानी दिया जाएगा। दूसरी तरफ बारहमासी फसलों को पानी केवल तभी मिलेगा जब बांधों में पर्याप्त जल भंडार उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही, सरकार किसानों के बीच पानी की बचत करने वाली आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देगी।