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Home› Khabar Junction› After Flowers Saffron Arrives In Ladakh Avenues For Earning From Farmers To Local Entrepreneurs

फूलों के बाद लद्दाख में केसर की दस्तक: किसानों से स्थानीय उद्यमियों तक खुलेगा कमाई का रास्ता

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 05 Oct 2026 06:49 PM IST
सार

लद्दाख में पहली बार करीब 4,000 वर्ग मीटर बंजर जमीन पर 90 हजार ईरानी केसर के कंद लगाए गए हैं। सफल होने पर यह प्रयोग किसानों को अधिक मूल्य वाली फसल के जरिए अतिरिक्त आय का नया विकल्प दे सकता है।
 

केसर की खेती
केसर की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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लद्दाख में लिलियम और ग्लैडियोलस जैसे फूलों की खेती के सफल प्रयोग के बाद अब केसर की खेती शुरू की गई है। लेह में करीब तीन महीने पहले तक बंजर पड़ी जमीन के एक हिस्से को खेती योग्य बनाकर यहां प्रीमियम ईरानी केसर के 90 हजार कंद लगाए गए हैं। इससे किसानों के लिए अधिक आय वाली नई फसल का विकल्प तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की पहल पर करीब 4,000 वर्ग मीटर जमीन में करीब 800 किलो केसर के कंद लगाए गए हैं। यह जमीन पहले बंजर थी, जिसे प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत पानी और अन्य सुविधाओं की मदद से फिर से खेती योग्य बनाया गया है।

प्रशासन का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो लद्दाख में किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए कमाई का नया जरिया खुल सकता है। यह पायलट परियोजना लेह के स्पितुक फारका स्थित कमांड एरिया गेट नंबर 27 में शुरू की गई है। यहां अच्छी गुणवत्ता वाले ईरानी केसर के कंद लगाए गए हैं। इन कंदों का आकार और वजन बेहतर उत्पादन के लिए उपयुक्त माना गया है।

बंजर जमीन को खेती योग्य बनाने की कोशिश
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख की ऊंचाई और विशेष जलवायु में केसर की खेती की काफी संभावनाएं हैं। इससे यह धारणा भी बदल सकती है कि लद्दाख में केसर की खेती नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य बंजर और खराब हो चुकी जमीन को फिर से उत्पादक बनाना और किसानों के लिए नई आय के अवसर तैयार करना है। केसर जैसी अधिक मूल्य वाली फसल किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद कर सकती है।

जम्मू-कश्मीर के बाद लद्दाख में प्रयोग
भारत में केसर की खेती का मुख्य क्षेत्र जम्मू-कश्मीर है। देश के कुल केसर उत्पादन में जम्मू-कश्मीर की हिस्सेदारी करीब 90 फीसदी है। लद्दाख में अभी इसकी खेती को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है, ताकि यहां की जलवायु में इसकी उपयुक्तता और आर्थिक लाभ का आकलन किया जा सके।

800 एकड़ जमीन को फिर खेती योग्य बनाने की योजना
केसर की खेती वाली जमीन करीब 800 एकड़ क्षेत्र को दोबारा खेती योग्य बनाने की योजना का हिस्सा है। इसके लिए पास की इगू-पेह सिंचाई नहर को बहाल किया गया है। नहर के अतिरिक्त पानी को बंजर जमीन तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे मिट्टी में नमी बढ़े और जमीन खेती के लिए तैयार हो सके।

प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत इस क्षेत्र में चार पानी के तालाब भी बनाए गए हैं। इनकी कुल जल भंडारण क्षमता करीब 2.4 करोड़ लीटर है। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।
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