आलू की बुवाई से पहले किसानों को मिट्टी की जांच कराने की सलाह।
खेतों में अधिक नमी के कारण जड़ गलन रोग का खतरा।
कृषि वैज्ञानिकों ने बीज उपचार और सही किस्म के चुनाव पर दिया जोर।
कुफरी बहार, कुफरी नीलकंठ और कुफरी गंगा समेत कई उन्नत किस्मों की सलाह।
आलू की बंपर पैदावार के लिए किसानों को बुवाई से पहले कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए। जानकारों के अनुसार, बुवाई से पहले किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवानी चाहिए। मिट्टी की जांच से जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की सही जानकारी मिल जाती है, जिसके हिसाब से ही खेत में खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि बुवाई से पहले आलू के बीज को अच्छी तरह से उपचारित करना बेहद जरूरी है। बीज उपचारित करके बोने से आलू का जमाव बहुत अच्छा होता है और फसल कई तरह के रोगों से भी सुरक्षित रहती है।
नमी के कारण जड़ गलन का खतरा, बुवाई में बरतें सावधानी
हाल ही में हुई बारिश की वजह से खेतों की मिट्टी में अभी नमी ज्यादा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस अधिक नमी की वजह से आलू की फसल में जड़ गलन जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे थोड़ा रुक कर ही आलू की बुवाई करें। साथ ही यह भी हिदायत दी गई है कि आलू के बीज की कलम करके बुवाई बिल्कुल न करें। देश की जलवायु के अनुसार आलू की अगेती बुवाई 15 सितंबर से 25 सितंबर तक, मुख्य बुवाई 15 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच और पछेती बुवाई 15 नवंबर से 25 दिसंबर के बीच की जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु के हिसाब से कुफरी बहार, कुफरी नीलकंठ, कुफरी गंगा, कुफरी ख्याति, कुफरी सूर्या, मोहन, पुखराज, गरिमा और चिप्सोना जैसी उन्नत प्रजातियों का चुनाव करना चाहिए।
कुफरी स्वाति कम समय में बंपर उपज
कम समय में आलू की फसल लेना चाहते है, तो कुफरी स्वाति एक अच्छी किस्म साबित हो सकती है। यह किस्म मात्र 70 से 85 दिनों में तैयार हो जाती है। हालांकि, फसल तैयार होने का यह समय मौसम, बुवाई के समय और फसल प्रबंधन पर निर्भर करता है। इसलिए इस किस्म की बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेना फायदेमंद रहता है।
बड़ी जोत के लिए कुफरी बादशाह
व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों के लिए कुफरी बादशाह काफी उपयुक्त मानी जाती है। यह एक लंबी अवधि वाली किस्म है, जिसे तैयार होने में लगभग 100 से 115 दिन लगते हैं।
कुफरी चिप्सोना-3 आलू प्रसंस्करण में चमकेगा
वहीं, जो किसान अपना आलू सीधे चिप्स बनाने वाली कंपनियों या प्रसंस्करण इकाइयों को बेचना चाहते हैं, उनके लिए कुफरी चिप्सोना-3 एक आदर्श किस्म है। यह किस्म मुख्य रूप से चिप्स उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित की गई है और लगभग 95 से 105 दिनों में तैयार हो जाती है। व्यावसायिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए किसानों को इसकी खेती शुरू करने से पहले खरीदार कंपनियों की गुणवत्ता संबंधी शर्तों और बाजार की मांग को अच्छे से समझ लेना चाहिए।
आलू की खेती के लिए जरूरी सावधानियां
इन उन्नत किस्मों से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को जलवायु, मिट्टी और बीज से जुड़ी कुछ अहम बातों का ध्यान रखना चाहिए। आलू की फसल के लिए ठंडा मौसम सबसे अनुकूल होता है। इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली भुरभुरी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।