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हिमाचल प्रदेश : खेती में कीटनाशकों का खर्च होगा कम, किसानों को सिखाए गए कीट नियंत्रण के तरीके

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 05 Nov 2026 07:40 PM IST
सार

सोलन में कृषि विज्ञान केंद्र और केंद्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र ने किसानों को फसल में कीट और रोग नियंत्रण की ट्रेनिंग दी। जानें कैसे कम कर सकते हैं कीटनाशकों का खर्च।
 

कीटनाशक का छिड़काव करता किसान
कीटनाशक का छिड़काव करता किसान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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फसलों को कीट और बीमारियों से बचाने के लिए हर बार रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। किसान जैविक और यांत्रिक तरीकों के साथ सही समय पर कीटों की पहचान करके भी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। इसी उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्र सोलन और केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र की ओर से दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसमें जिले के करीब 50 किसानों ने हिस्सा लिया।

किसानों को सिखाए कीट और रोगों से बचाव के तरीके
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों और बीमारियों की पहचान करने के तरीके बताए। साथ ही कीटों के जीवन चक्र और उनके नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई। केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के डॉ. विवेक, पादप संरक्षण अधिकारी डॉ. आदर्श शर्मा और डॉ. आयुष लाल दास ने किसानों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (IPM) की तकनीकों के बारे में बताया।

प्रशिक्षण में इन तरीकों की जानकारी दी गई
  • जैविक नियंत्रण : फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए जैविक उपाय अपनाना।
  • यांत्रिक नियंत्रण : कीटों को पकड़ने और उनकी संख्या कम करने के लिए उपयोगी तरीके अपनाना।
  • संतुलित कीटनाशक इस्तेमाल : जरूरत पड़ने पर ही सही मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग करना।
  • समय पर पहचान : फसल में कीट या बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर बचाव करना।

सही समय पर कीट प्रबंधन से घटेगी खेती की लागत
कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट की डॉ. सीमा ठाकुर ने किसानों से खेती में वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि कीट और बीमारियों का समय पर प्रबंधन करने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है। इससे किसानों की आय बढ़ाने की संभावना भी रहती है। डॉ. राजेश ठाकुर ने भी फसल सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण में बताई गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

टमाटर की उन्नत खेती पर जारी किया सूचना पत्रक
प्रशिक्षण शिविर के दौरान सोलन जिले के किसानों के लिए टमाटर की उन्नत खेती पर आधारित एक विशेष सूचना पत्रक भी जारी किया गया। इसमें टमाटर की वैज्ञानिक खेती, बेहतर पैदावार और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारियां दी गई हैं। कार्यक्रम में किसानों ने अपनी खेती से जुड़ी समस्याएं और सवाल भी विशेषज्ञों के सामने रखे। वैज्ञानिकों ने उनकी समस्याओं का समाधान बताया।

किसानों को क्या फायदा होगा?
इस प्रशिक्षण से किसानों को फसल में कीट और रोगों की समय पर पहचान करने, रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करने और सुरक्षित खेती के तरीके अपनाने में मदद मिलेगी। एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी मदद मिल सकती है।
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