विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Lentil Cultivation Yield Good Yield Less Irrigation Sow Seven Improved Varieties In November

Lentil Farming: मसूर की खेती से कम सिंचाई में मिलेगी अच्छी पैदावार, नवंबर में बोएं ये 7 उन्नत किस्में

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 05 Nov 2026 07:21 PM IST
सार

  • नवंबर का पहला पखवाड़ा मसूर की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त।

  • बुंदेलखंड की मार और काबर मिट्टी मसूर की खेती के लिए अच्छी।

  • आईपीएल-220, आईपीएल-315 और आईपीएल-534 समेत 7 उन्नत किस्मों की सलाह।

  • आईपीएल-220 में आयरन और जिंक की मात्रा अधिक।

मसूर की फसल
मसूर की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रबी सीजन में मसूर की खेती करने वाले किसानों के लिए नवंबर का पहला पखवाड़ा बुवाई का सबसे अच्छा समय है। बुंदेलखंड की मिट्टी और जलवायु मसूर की खेती के अनुकूल है। ऐसे में किसान सही किस्मों का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर कम सिंचाई में भी अच्छी फसल ले सकते हैं।

रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बुंदेलखंड के किसानों को रबी सीजन में मसूर की वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की मार और काबर मिट्टी मसूर की खेती के लिए उपयुक्त है। इन मिट्टियों में नमी रोककर रखने की क्षमता अधिक होती है, जिससे फसल को कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है।

मसूर की बुवाई कब करें?
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, मसूर की बुवाई के लिए नवंबर का पहला पखवाड़ा सबसे उपयुक्त है। किसानों को बेहतर अंकुरण और अच्छी पैदावार के लिए समय पर बुवाई करनी चाहिए।

मसूर की ये 7 उन्नत किस्में लगाएं
किसान अच्छी पैदावार के लिए इन उन्नत किस्मों का चुनाव कर सकते हैं।
  1. आईपीएल-220
  2. आईपीएल-315
  3. आईपीएल-316
  4. आईपीएल-329
  5. आईपीएल-534
  6. एल-4717
  7. एल-4727

खास बात : आईपीएल-220 किस्म में आयरन और जिंक की मात्रा अधिक पाई जाती है। इस वजह से यह पोषण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

कितने दिन में तैयार होती है मसूर की फसल?
मसूर की फसल सामान्यतः 120 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसलिए किसान बुवाई का समय तय करते समय फसल की अवधि का ध्यान रखें।

मसूर का सरकारी भाव कितना है?
भारत सरकार ने मसूर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2026-27 के लिए 7,390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। एमएसपी वह न्यूनतम दर है, जिस पर सरकार किसानों की उपज खरीदने की व्यवस्था करती है। हालांकि, वास्तविक खरीद सरकारी खरीद केंद्रों और निर्धारित नियमों के अनुसार होती है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह
बुंदेलखंड के किसानों के लिए मसूर की खेती कम सिंचाई में दलहन उत्पादन का अच्छा विकल्प हो सकती है। स्थानीय मिट्टी के अनुकूल किस्मों का चुनाव करें और बुवाई के लिए कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह लें।
विज्ञापन
विज्ञापन