महाराष्ट्र के अहिल्यानगर, बीड और मराठवाड़ा समेत कई हिस्सों में कमजोर मानसून के कारण खरीफ की फसलें बड़े पैमाने पर सूखकर बर्बाद हो गई हैं। फसल खराब होने से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक हो गई है और अब आगामी रबी सीजन की बुवाई पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खेतों से होने वाली आमदनी से कर्ज चुकाने और अगली फसल लगाने की उम्मीद टूटने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पानी और चारे की भारी किल्लत शुरू हो गई है। हालात इतने विकट हैं कि सितंबर के महीने में ही गांवों में पानी के टैंकर पहुंचाने पड़ रहे हैं और परिवारों को काम की तलाश में समय से पहले पलायन करना पड़ रहा है।
बारिश में भारी गिरावट, खेतों में 80 से 90 फीसदी तक नुकसान
मौसम विभाग और कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 21 सितंबर के बीच महाराष्ट्र के 36 में से 27 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। राज्य में इस दौरान कुल 782.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 946 मिमी से 17 प्रतिशत कम है। सोलापुर में सबसे अधिक 58 प्रतिशत और बीड में 49 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
बीड के कृषि विभाग के मुताबिक, जिले की 7.7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से करीब 5 लाख हेक्टेयर में फसलों को भारी क्षति पहुंची है। कई क्षेत्रों में सोयाबीन और कपास का नुकसान 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं अहिल्यानगर की पाथर्डी तहसील में कपास, तुअर, सोयाबीन और संतरे के बागों में कम से कम 70 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है। पानी के अभाव में फलदार पेड़ सूख रहे हैं और किसानों के लिए महंगे निजी टैंकरों से सिंचाई करना अब संभव नहीं रह गया है।
रबी की बुवाई पर संशय, चारे का संकट
खरीफ की विफलता का सीधा असर रबी सीजन पर पड़ रहा है। बीड और अहिल्यानगर के किसानों का कहना है कि खेतों में नमी की कमी और हाथ में पूंजी न होने के कारण वे चना और ज्वार की बुवाई की स्थिति में नहीं हैं। बीज और खाद दुकानदारों की उधारी न चुका पाने के कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में बीड जिले में 256 किसानों ने आत्महत्या की, जो मराठवाड़ा के आठ जिलों में सर्वाधिक है।
दूसरी तरफ, खेतों में घास न होने से पशुपालकों के सामने चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। स्थिति यह है कि अहिल्यानगर के चेकेवाड़ी में 50,000 रुपये की गाय को 20,000 रुपये के सस्ते दाम में बेचने की नौबत आ गई। चारे की कमी से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अहिल्यानगर से बाहर चारा भेजने पर पाबंदी लगा दी है। इसके अलावा, पेयजल संकट से जूझ रहे अहिल्यानगर के 110 गांवों और 376 बस्तियों में करीब 2.2 लाख लोगों तक 114 सरकारी टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।
कामगार और किसानों का पलायन
फसल बर्बाद होने के बाद आमदनी का जरिया खत्म होने से पाथर्डी, शेवगांव और कर्जत-जामखेड जैसे इलाकों से मजदूर और छोटे किसान काम की तलाश में पश्चिमी महाराष्ट्र के गन्ना क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। आमतौर पर गन्ने की कटाई के लिए होने वाला यह पलायन जनवरी या फरवरी में शुरू होता था, लेकिन इस बार सितंबर में ही शुरू हो गया है। प्रशासन के अनुसार, नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे की तैयारी की जा रही है। अहिल्यानगर के जिलाधिकारी पंकज आशिया ने बताया कि 30 सितंबर के बाद औपचारिक फसल क्षति सर्वेक्षण शुरू होगा। बीड के जिलाधिकारी विवेक जॉनसन के अनुसार, अधिकांश तहसीलों में 80 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान देखा गया है और रबी सीजन की तैयारी के लिए किसानों को समय पर आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।
सरकारी स्तर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार केंद्रीय आपदा कोष की प्रतीक्षा किए बिना किसानों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराएगी, जबकि केंद्रीय सहायता के लिए औपचारिक फसल-नुकसान आकलन 5 अक्टूबर के बाद शुरू होगा। वहीं, विपक्षी नेता शरद पवार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए औपचारिक प्रक्रिया को दरकिनार कर तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और खेतिहर मजदूर परिवारों को 25,000 रुपये की राहत राशि देने का आग्रह किया है।