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Kashmir Apple: कश्मीर के सेब को मिली रफ्तार, रेल से 22 घंटे में दिल्ली पहुंच रही फसल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 16 Oct 2026 02:30 PM IST
सार

  • रेल मार्ग से कश्मीर के सेब करीब 20 से 22 घंटे में दिल्ली पहुंच रहे हैं।
  • सड़क मार्ग से दिल्ली पहुंचने में पहले 36 से 55 घंटे तक लगते थे।
  • रेल से सेब करीब 30 से 32 घंटे में मुंबई पहुंचाए जा सकते हैं।
  • कश्मीर घाटी में हर साल करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होता है।

सेब की बगिया
सेब की बगिया - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कश्मीर के बागवानों के लिए सेब को देश की बड़ी मंडियों तक पहुंचाना अब पहले के मुकाबले आसान हो रहा है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) के जरिए घाटी के सेब करीब 20 से 22 घंटे में दिल्ली पहुंच रहे हैं। पहले सड़क मार्ग से दिल्ली पहुंचने में 36 से 55 घंटे तक लग जाते थे। वहीं, रेल मार्ग से सेब करीब 30 से 32 घंटे में मुंबई भी पहुंचाए जा सकते हैं। इससे समय की बचत हो रही है और लंबी दूरी तक सेब पहुंचाने में बागवानों को राहत मिल रही है।

कश्मीर घाटी में हर साल करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। देश के कुल सेब उत्पादन में घाटी की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत बताई जाती है। सेब कारोबार कश्मीर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इससे सालाना 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान होता है। इस कारोबार से करीब 33 लाख लोग जुड़े हैं।

फसल खराब होने का खतरा होगा कम
सेब जल्दी खराब होने वाली उपज है। ऐसे में इसे समय पर मंडियों तक पहुंचाना बागवानों के लिए बेहद जरूरी है। सड़क मार्ग पर लंबा सफर और देरी होने से फसल खराब होने का जोखिम बढ़ जाता है। रेल परिवहन से सफर का समय कम होने पर सेब को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिल रही है।

साल 2023 में कश्मीर के सेब कारोबार को भारी नुकसान हुआ था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उस दौरान 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि करीब 2,000 करोड़ रुपये की फसल खराब होने की बात सामने आई थी। ऐसे में परिवहन के बेहतर विकल्प बागवानों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

सितंबर 2025 तक 20 हजार टन से अधिक सेब भेजे गए
रेल परिवहन के जरिए सेब को देश के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाने में भी प्रगति हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2025 तक 20 हजार टन से अधिक सेब रेल मार्ग से भेजे जा चुके थे। इससे सेब को सुरक्षित और कम लागत में बाजार तक पहुंचाने में मदद मिली।

रेल सेवा से कश्मीर के बागवानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने का एक और विकल्प मिला है। इससे सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने और सेब कारोबार को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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