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विश्व खाद्य दिवस 2026: ICAR महानिदेशक ने कहा, खेती में नवाचार से पोषण भरेगी थाली, पौष्टिक भोजन को बताया जरूरी

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 16 Oct 2026 02:28 PM IST
सार

  • हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम है ‘आज नवाचार करें और कल को पोषण दें’।
  • ICAR महानिदेशक प्रो. एम.एल. जाट ने पौष्टिक और सुरक्षित भोजन को आत्मनिर्भर भारत के लिए जरूरी बताया है।
  • प्रो. एम.एल. जाट ने जलवायु परिवर्तन और घटते प्राकृतिक संसाधनों से निपटने के लिए कृषि में नवाचार पर जोर दिया है।

खेती की चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार कुंजी।
खेती की चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार कुंजी। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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हर साल 16 अक्तूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन खाद्य असुरक्षा, कम पोषण और भुखमरी के प्रति जागरुकता बढ़ाने पर फोकस किया जाता है। यह दिन याद दिलाता है कि पौष्टिक और सुरक्षित भोजन हर इंसान की मूलभूत अधिकार है। 

मजबूत भारत के लिए पौष्टिक और सुरक्षित भोजन जरूरी 
इस साल विश्व खाद्य दिवस की थीम तकनीक पर ज्यादा फोकस करती दिखाई देती है। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एम.एल. जाट ने 
एक स्वस्थ और आत्मनिर्भरक और टिकाऊ भारत को बनाने के लिए पौष्टिक और सुरक्षित भोजन को सबसे जरूरी बताया है। उन्होंने इस वर्ष की विश्व खाद्य दिवस की थीम इनोवेट टुडे एंड नरिश टुमारो (आज नवाचार करें और कल को पोषण दें) का जिक्र करते हुए हमारी कृषि और खाद्य व्यवस्था को बेहतर बनाने में विज्ञान और नई तकनीकों की अहम भूमिका पर जोर दिया है।

तकनीक खेती-बाड़ी की मौजूदा चुनौतियों से निपटने की अहम कुंजी
ICAR महानिदेशक के अनुसार, आज हम जलवायु परिवर्तन, सीमित होते प्राकृतिक संसाधनों और बढ़ती पोषण संबंधी जरूरतों जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में खेती-किसानी में नवाचार (Innovation) ही लगातार और सुरक्षित अन्न उत्पादन और किसानों की आजीविका को सुरक्षित करने की मुख्य कुंजी है।

लैब से निकलकर खेतों तक पहुंचे विज्ञान
एम.एल. जाट ने जानकारी दी कि ICAR जलवायु के अनुकूल कृषि व्यवस्था तैयार करने के लिए विज्ञान और तकनीक को लगातार आगे बढ़ा रही है। इसमें केवल खेती ही नहीं, बल्कि पशुपालन, मछली पालन और पूरी मूल्य शृंखला भी शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य खेती की पैदावार बढ़ाना, उसे टिकाऊ बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

हालांकि, महानिदेशक ने साफतौर से कहा कि विज्ञान और शोध को केवल रिसर्च प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका सीधा फायदा किसानों और उनके खेतों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो और देश के हर नागरिक को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।

किसानों और विज्ञान के बीच मजबूत साझेदारी की जरूरत
विश्व खाद्य दिवस के इस खास मौके पर महानिदेशक ने विज्ञान, किसानों और खेती से जुड़े सभी लोगों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने टिकाऊ कृषि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि आज हमें एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ नई तकनीकों को अपनाना होगा, ताकि हमारा आने वाला कल पूरी तरह से खाद्य और पोषण से सुरक्षित हो सके।

 
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