कर्नाटक में 2026-27 का गन्ना पेराई सीजन शुरू होने के साथ ही किसानों ने गन्ने का भाव तय करने की मांग तेज कर दी है। किसान संगठनों की मांग है कि चीनी मिलों को अलग-अलग भाव घोषित करने के बजाय गन्ने की कीमत 5,500 रुपये प्रति टन तय की जाए। कर्नाटक राज्य रैयत संघ और हसिरु सेना ने इस मांग को लेकर 29 सितंबर को हुबली में केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास के सामने प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
7.5 लाख हेक्टेयर में होती है गन्ने की खेती
कर्नाटक में करीब 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। राज्य में सालाना करीब 630 लाख टन गन्ने का उत्पादन होने का अनुमान है। इसमें से लगभग 576 लाख टन गन्ने की पेराई 89 चीनी मिलों में होती है। इन मिलों से करीब 50 लाख टन चीनी का उत्पादन होता है। राज्य में बेलगावी जिले में सबसे ज्यादा 29 चीनी मिलें हैं।
लागत के आधार पर भाव तय करने की मांग
किसान संगठन कई वर्षों से मांग कर रहे हैं कि गन्ने का भाव उसकी वास्तविक खेती लागत को ध्यान में रखकर तय किया जाए। केंद्र सरकार गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) घोषित करती है। वहीं, कर्नाटक सरकार की ओर से गन्ने के लिए राज्य सलाहकार मूल्य (SAP) तय नहीं किया जाता है।
पिछले साल भी किसानों ने मुडलगी तालुक के गुरलापुर क्रॉस पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन किया था और सड़क जाम की थी। इसके बाद सरकार ने गन्ने का भाव 3,300 रुपये प्रति टन तय करने के साथ राज्य की ओर से अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की थी।
सूखे से उत्पादन घटने की चिंता
किसानों को इस साल की फसल को लेकर भी चिंता है। उनका कहना है कि सूखे और कम बारिश से गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं, खेती की लागत में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सरकार को लागत के आधार पर गन्ने का भाव तय करना चाहिए।
किसानों का यह भी कहना है कि खुले बाजार में चीनी के दाम बढ़ने से चीनी मिलों को फायदा हुआ है, लेकिन इसका पर्याप्त लाभ गन्ना किसानों तक नहीं पहुंचा है। किसान पिछले साल की तुलना में 200 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भुगतान की मांग कर रहे हैं।
FRP 4,500 और SAP 800 रुपये की मांग
कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुर्बार शांतकुमार के मुताबिक, कर्नाटक किसान संगठनों के महासंघ ने केंद्र से गन्ने का FRP 4,500 रुपये प्रति टन करने की मांग की है। साथ ही राज्य सरकार से तमिलनाडु की तर्ज पर 800 रुपये प्रति टन SAP देने की मांग की गई है।
कर्नाटक राज्य रैयत संघ और हसिरु सेना के अध्यक्ष चुनप्पा पुजारी ने कहा कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) पिछले नौ वर्षों से 31 रुपये प्रति किलो पर बना हुआ है, जबकि गन्ने की खेती की लागत तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई है। उनका कहना है कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 60 रुपये प्रति किलो किया जाए। इससे किसानों को गन्ने का 5,500 रुपये प्रति टन भाव देने में मदद मिल सकती है।
व्यावसायिक इस्तेमाल वाली चीनी का भाव 100 रुपये करने की मांग
किसान संगठनों ने सॉफ्ट ड्रिंक और चॉकलेट बनाने जैसे व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बेची जाने वाली चीनी का भाव 100 रुपये प्रति किलो तय करने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे चीनी मिलों की आमदनी बढ़ेगी और किसानों को गन्ने का ज्यादा दाम देने की गुंजाइश बनेगी।
29 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन में गन्ने के अलावा चीनी मिलों से बनने वाले एथनॉल की खरीद, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को 60 रुपये प्रति किलो करने और गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे।
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