कर्नाटक के गन्ना किसान अपनी उपज के बेहतर दाम की मांग को लेकर पिछले 6 दिनों से चल रही अपनी हुबली चलो पदयात्रा को सोमवार को अभी के लिए रोक सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 23 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की रैली के बाद यह प्रदर्शन अगले हफ्ते फिर से शुरू होने की संभावना है।
गन्ने के उचित दाम और दिल्ली रैली पर नजर
किसानों ने अपनी मांगों को लेकर कई दिनों तक सड़क जाम करने के बाद पिछले हफ्ते बेलगावी जिले के हत्तरगी से यह मार्च शुरू किया था। किसानों की मुख्य मांग गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य में बदलाव करना है।
किसान नेताओं के अनुसार, दिल्ली में 23 अक्टूबर को होने वाली रैली बेहद अहम है। राष्ट्रीय नेतृत्व से निर्देश मिलने के बाद ही कर्नाटक के किसान अपना प्रदर्शन दोबारा शुरू करेंगे। दिल्ली की इसी बैठक में तय होगा कि गन्ने के दामों को लेकर पूरे देश में कोई बड़ा आंदोलन शुरू किया जाए या नहीं।
मुख्यमंत्री ने दिया राज्य स्तर पर मदद का भरोसा
बेलगावी-धारवाड़ जिले की सीमा पर स्थित तेगूर गांव के पास हुई एक बैठक में नेताओं ने आंदोलन को फिलहाल रोकने पर चर्चा की। इस चर्चा का एक कारण मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा दिया गया आश्वासन भी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार अगले हफ्ते किसानों, चीनी मिल के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को कित्तूर में किसानों को भरोसा दिया था कि सरकार मिलों को दिए जाने वाले गन्ने पर 1,000 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त 'राज्य परामर्श मूल्य' (SAP) देने की मांग पर विचार करने के लिए तैयार है। कुछ किसानों का मानना है कि अगला कदम उठाने से पहले मुख्यमंत्री के इस भरोसे की जानकारी गांवों तक पहुंचानी चाहिए।
केंद्र सरकार से जवाब का इंतजार और खेतों की चिंता
किसानों ने एमएसपी और एफआरपी में बदलाव के फैसले के लिए केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को रविवार शाम तक का समय दिया था। किसान नेता चुनप्पा पुजेरी ने बताया कि यदि केंद्र सरकार की ओर से कोई फैसला आता, तो किसान अपना आंदोलन वापस लेने को तैयार थे, लेकिन तय समय तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
इसके अलावा, किसान आंदोलन को अस्थायी रूप से रोकने के पीछे खेतों की स्थिति भी एक बड़ी वजह है। किसानों ने चिंता जताई है कि वे 13 अक्टूबर से ही अपने खेतों से दूर हैं। ऐसे में कम बारिश और सिंचाई के अभाव में गन्ने की खड़ी फसल को नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही, किसानों का यह भी मानना है कि केंद्र सरकार की जो विशेषज्ञ समिति गन्ने के दाम और चीनी के मूल्य की जांच कर रही है, उसे अपना काम पूरा करने के लिए थोड़ा और समय दिया जाना चाहिए।