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कर्नाटक : विश्व बैंक समर्थित कार्यक्रम के तहत ₹150 करोड़ की लागत से 500 झीलों का होगा पुनरुद्धार

गांव जंक्शन डेस्क, बेंगलुरु Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 22 Sep 2026 01:42 PM IST
सार

कर्नाटक सरकार ने विश्व बैंक की मदद से सात जिलों की 500 झीलों के पुनर्जीवन के लिए 150 करोड़ रुपये की परियोजना रिपोर्ट तैयार की है। ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने झील विकास कार्य तेज करने, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और मनरेगा मजदूरी समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री खंड्रे।
कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री खंड्रे। - फोटो : क्रिएटिव कॉमन्स
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विस्तार
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सूखे जैसी स्थिति के बीच कर्नाटक सरकार ने राज्य की झीलों को नया जीवन देने की एक बड़ी योजना तैयार की है। राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने मंगलवार को बताया कि विश्व बैंक की सहायता से चल रहे कार्यक्रम के तहत सात जिलों की 500 झीलों के पुनर्जीवन के लिए 150 करोड़ रुपये की व्यापक परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।

जिला पंचायत सीईओ को काम तेज करने के निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री खंड्रे ने संबंधित जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को झील विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। यहां विकास सौधा स्थित अपने कार्यालय में गांवों में पेयजल संकट को लेकर जिला पंचायत सीईओ के साथ आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विश्व बैंक सहायता प्राप्त कार्यक्रम और केंद्र की ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (VB-G RAM G) के तालमेल से सिल्ट सफाई, बांध की मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने, सौंदर्यीकरण और नहरों की मरम्मत जैसे काम किए जाएं।

सूखे के मौसम को बताया झील पुनर्जीवन के लिए उपयुक्त समय
खंड्रे ने कहा कि मौजूदा समय में बारिश की कमी के कारण झीलें सूख चुकी हैं, और यही वक्त झील व नहर पुनर्जीवन कार्यों के लिए सबसे उपयुक्त है। उन्होंने कहा, "अगर मानसून के बाद अच्छी बारिश होती है, तो इन झीलों में पानी भर जाएगा। इससे अगली गर्मी में होने वाली पानी की कमी से निपटने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे मिट्टी की नमी और भूजल स्तर में भी सुधार होगा।" उन्होंने इस काम को तुरंत शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया।

किस जिले में कितनी झीलों का होगा पुनर्जीवन
खंड्रे ने बताया कि इस परियोजना के तहत बेंगलुरु ग्रामीण में 68, बेंगलुरु शहरी में 67, बीदर में 44, चिक्कबल्लापुर में 90, कलबुर्गी में 49, तुमकुरु में 96 और कोलार जिले में 86 झीलों के पुनर्जीवन की योजना बनाई गई है।

स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और नियमित जांच के निर्देश
मंत्री ने सीईओ और पंचायत विकास अधिकारियों (पीडीओ) को निर्देश दिया कि सभी गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए। उन्होंने कहा कि दूषित पानी की शिकायत मिलने पर अधिकारियों को तुरंत जलस्रोत से लेकर घरेलू नल तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला का निरीक्षण करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सीवेज या गंदा पानी पेयजल व्यवस्था में न मिल पाए।

इन जिलों में रोजगार गारंटी कार्य तेज करने के निर्देश
खंड्रे ने अधिकारियों को बेंगलुरु, बेलगावी, उत्तर कन्नड़, धारवाड़ और कोडागु जैसे जिलों में VBG Ram G के तहत काम तेज करने के निर्देश दिए, जहां रोजगार दिवसों (पर्सन-डेज) का सृजन अपेक्षाकृत कम रहा है।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर
उन्होंने बताया कि अब राज्य की आवास योजनाओं को भी ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के दायरे में लाया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की गुंजाइश बनी है। खंड्रे ने कहा कि इस अवसर का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए कि राज्य के किसी भी हिस्से से लोग रोजगार की तलाश में पलायन न करें।

15 दिन के भीतर मजदूरी भुगतान का निर्देश
मंत्री ने निर्देश दिया कि VB-G Ram G के तहत काम करने वाले मजदूरों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर मजदूरों को एक महीने बाद भी मजदूरी नहीं मिलती, तो वे काम पर आना बंद कर देंगे, जिससे इस योजना का मकसद ही विफल हो जाएगा।" उन्होंने सीईओ को निर्देश दिया कि वे पीडीओ और कोषागार अधिकारियों को समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी करें।
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