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हिमाचल में सेब खरीद व्यवस्था बदली : ऑनलाइन पोर्टल से 12 रुपये किलो की दर से 4,188 टन सेब की हुई खरीद, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 22 Sep 2026 01:44 PM IST
सार

  • बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत हिमाचल के सेब बागवानों से 18 सितंबर तक 4,188.504 मीट्रिक टन सेब की खरीद।
  • खरीद व्यवस्था में डिजिटल तकनीक का उपयोग, खरीद का पूरा रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज।
  • उपज बेचेने के लिए सबसे पहले किसानों का पंजीकरण होता है।

हिमाचल में MIS के तहत सेब खरीद 4,188.504 मीट्रिक टन पहुंची।
हिमाचल में MIS के तहत सेब खरीद 4,188.504 मीट्रिक टन पहुंची। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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हिमाचल सरकार प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए HPMC (हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड) उपज की खरीद से प्रोसेसिंग और बाजार तक की प्रक्रिया में नई तकनीक का उपयोग कर रही है। प्रदेश के कुल फल उत्पादन में अकेले सेब की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। ऐसे में इस क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए एचपीएमसी ने अपने कामकाज का विस्तार किया है, जिससे काम में तेजी और पारदर्शिता आई है।

बगीचे से बाजार तक पहुंची तकनीक
एक वरिष्ठ एचपीएमसी अधिकारी के अनुसार, निगम ने तकनीक आधारित इस पूरी व्यवस्था को बगीचे से बाजार तक पहुंचा दिया है। नई प्रणाली के तहत अब बागवान ऑनलाइन पंजीकरण करते हैं और खरीद से जुड़ी सभी जानकारी एक डिजिटल पोर्टल पर दर्ज की जाती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना और काम को आसान बनाना है। इसी कारोबारी विस्तार और नई व्यवस्थाओं के चलते साल 2025-26 में एचपीएमसी का टर्नओवर 214.19 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।

ऑनलाइन पोर्टल से हो रही सेब की बंपर खरीद
इस नई डिजिटल प्रणाली का असर खरीद के आंकड़ों में भी दिख रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, बाजार हस्तक्षेप योजना-2026 के तहत 18 सितंबर 2026 तक एचपीएमसी ने किसानों से 4,188.504 मीट्रिक टन सेब की खरीद कर ली है। यह पूरी खरीद केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 12 रुपये प्रति किलोग्राम के तय मूल्य पर की जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से किसानों का खरीद प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ेगा।

सेब के कचरे का इस्तेमाल और नया कार्टन सिस्टम
राज्य सरकार के अनुसार, अब सेब के कचरे का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल करने और इससे नए उत्पाद बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सेब की बर्बादी को कम करना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और बागवानी अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाना है। इसके साथ ही, सेब के व्यापार में एकरूपता लाने के लिए यूनिवर्सल कार्टन सिस्टम लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत सेबों को 20 किलो के एक समान डिब्बों (कार्टन) में पैक किया जाता है, जिसमें अलग-अलग ग्रेड के लिए खास मानक तय किए गए हैं। सरकार के अनुसार, डिजिटल खरीद के साथ-साथ इस स्टैंडर्ड पैकिंग प्रणाली से पैकिंग की गड़बड़ियां दूर होंगी, लेन-देन में अधिक पारदर्शिता आएगी और सीधे तौर पर किसानों के हितों की रक्षा होगी।


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