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कर्नाटक : सूखे से कपास की फसल बर्बाद, धान की अच्छी पैदावार और दाम से किसानों को राहत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 23 Oct 2026 07:28 PM IST
सार

कर्नाटक के यादगीर जिले में बारिश की कमी से कपास की फसल बर्बाद हुई है, जबकि सिंचाई वाले क्षेत्रों में धान की 77 किलो बोरी 3,100 रुपये तक बिक रही है। जानें किसानों का हाल।

धान और कपास
धान और कपास - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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कर्नाटक के यादगीर जिले में इस खरीफ सीजन में बारिश की भारी कमी ने बारिश पर निर्भर खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिले में कपास जैसी प्रमुख व्यावसायिक फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। कई किसानों को खराब हो चुके कपास के पौधे उखाड़कर दोबारा खेत तैयार करना पड़ रहा है। वहीं, सिंचाई की सुविधा वाले इलाकों में धान की अच्छी पैदावार और बेहतर कीमतों से किसानों को कुछ राहत मिली है।

कपास की खेती में लागत निकालना भी मुश्किल
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यादगीर जिले में कपास की फसल को सूखे का भारी नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने पंपसेट से सिंचाई करके फसल बचाने की कोशिश की, वे भी प्रति एकड़ केवल दो से तीन क्विंटल कपास ही प्राप्त कर सके।

वडागेरा गांव के किसान शंकरप्पा ने बताया कि कपास बेचकर मिलने वाली रकम से बीज, खाद, कीटनाशक और निराई-गुड़ाई पर हुए खर्च का चौथाई हिस्सा भी निकालना मुश्किल है। फसल खराब होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

धान की अच्छी पैदावार, 3,000 रुपये तक मिल रहा दाम
दूसरी ओर, कृष्णा और भीमा नदियों के पानी के साथ स्थानीय जलधाराओं से सिंचाई करने वाले किसानों को धान की अच्छी पैदावार मिली है। इन इलाकों में किसान प्रति एकड़ करीब 40 बोरी धान काट रहे हैं। 77 किलो की एक बोरी के लिए 3,000 से 3,100 रुपये तक कीमत मिल रही है।

गंगावती, सिंधानूर, सिरुगुप्पा और बल्लारी के थोक व्यापारी ट्रक लेकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंच रहे हैं और उनसे धान खरीद रहे हैं। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार तक ले जाने की जरूरत भी कम पड़ रही है।

तुरंत भुगतान पर एक फीसदी की कटौती
अबेटुमकुर गांव के किसान वीरुपन्नागौड़ा साहूकार ने बताया कि व्यापारी तुरंत भुगतान करने पर एक फीसदी रकम काट लेते हैं। वहीं, अगर किसान 15 दिन बाद भुगतान लेने के लिए तैयार होते हैं, तो उन्हें बिना किसी कटौती के पूरी रकम मिलती है। साहूकार ने लंबे समय तक बारिश नहीं होने के बावजूद भीमा नदी से पाइपलाइन बिछाकर अपने 45 एकड़ खेतों में सिंचाई की। इससे उन्हें धान की अच्छी फसल हासिल करने में मदद मिली।

प्रति एकड़ 40 हजार रुपये तक खेती का खर्च
धान की अच्छी पैदावार और बेहतर बाजार भाव के बावजूद किसानों को खेती पर काफी खर्च करना पड़ा है। बुवाई से लेकर कटाई तक प्रति एकड़ करीब 40,000 रुपये खर्च हुए हैं। जिले में सिंचाई की सुविधा वाले किसानों को धान की अच्छी कीमतों से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन बारिश पर निर्भर खेती करने वाले किसानों की फसल खराब होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है। सूखे की मार और खेती की लागत ने जिले के बड़ी संख्या में किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।
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