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खाद सब्सिडी बिल में बढ़त संभव : ICRIER का सुझाव- खेत जोतने वाले को दें नकद सब्सिडी, एग्रीस्टैक पर कही बड़ी बात

गांव जंक्शन डेस्क, मिर्जापुर Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 23 Oct 2026 06:23 PM IST
सार

  • चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का खाद सब्सिडी बिल में बढ़ोतरी की संभावना है।
  • ICRIER की रिपोर्ट में किसानों को सीधे नकद हस्तांतरण देने और खाद सब्सिडी व्यवस्था में सुधार की सिफारिश की गई है।
  • रिपोर्ट एग्रीस्टैक और किसान आईडी जैसी डिजिटल प्रणालियों के इस्तेमाल से पहले सुधार का वकालत करती है

उर्वरक सब्सिडी बिल के बोझ को कम करने के लिए सीधे किसानों को नकद सब्सिडी देने का सुझाव।
उर्वरक सब्सिडी बिल के बोझ को कम करने के लिए सीधे किसानों को नकद सब्सिडी देने का सुझाव। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल 1.70 लाख करोड़ के सरकारी बजट अनुमान से बढ़कर 2.42 लाख करोड़ से 3.32 लाख करोड़ के बीच पहुंच सकता है। इस बढ़ती आर्थिक चुनौती को देखते हुए इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) ने दो नीति पत्र जारी किए। इन रिपोर्टों में सुझाव दिया गया है कि किसानों को सीधे नकद हस्तांतरण किया जाना चाहिए और उर्वरक के उपयोग को सुव्यवस्थित करने के लिए एग्रीस्टैक जैसे डिजिटल ढांचे के इस्तेमाल में सावधानी बरती जानी चाहिए।

वैश्विक उथल-पुथल संग सरकारी खजाने पर बढ़ता गया बोझ
 
ये नीति पत्र कृषि अर्थशास्त्री और इक्रियर के विशिष्ट प्रोफेसर अशोक गुलाटी, नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद, और पूर्वी थंगराज, रितिका जुनेजा व तन्मय अधिकारी सहित अन्य विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल साल 2000-01 में लगभग 0.14 लाख करोड़ था, जो फसल क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धित का लगभग 4.7 प्रतिशत था। यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर खाद और ऊर्जा की कीमतों में उछाल के कारण 2022-23 में यह बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद के तीन सालों में यह बिल 1.7 से 1.9 लाख करोड़ रुपये के बीच रहा है। हालांकि, फरवरी 2026 के आखिर में होर्मुज रास्ते के बाधित होने से अब ₹1.71 लाख करोड़ का बजट आवंटन पहले से ही दबाव में है।

पंजाब-हरियाणा का खाद सब्सिडी में सबसे ज्यादा हिस्सा
नीति पत्र के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी का यह वित्तीय बोझ अलग-अलग राज्यों में बहुत असमान रूप से बंटा हुआ है। वर्ष 2024-25 को समाप्त होने वाले तीन साल के आंकड़ों से पता चलता है कि पंजाब और हरियाणा को प्रति हेक्टेयर सबसे अधिक नाइट्रोजन सब्सिडी मिली है, जो क्रमशः 25,701 और 21,071 है। यह राशि केरल (2,540 रुपये), असम (4,703 रुपये) और हिमाचल प्रदेश (4,710 रुपये) को मिलने वाली सब्सिडी से पांच से दस गुना अधिक है। उत्पादन मूल्य के प्रतिशत के रूप में भी, पंजाब (9.9 प्रतिशत) और हरियाणा (9.2 प्रतिशत) में यह केरल और हिमाचल प्रदेश (1.4-1.5 प्रतिशत) की तुलना में बहुत अधिक है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बड़े अंतर का मतलब है कि पंजाब और हरियाणा को दूसरे राज्यों की तुलना में केंद्र से बहुत अधिक सहायता मिलती है। चूंकि यह समर्थन सीधे आय के रूप में न मिलकर खाद के उपयोग से जुड़ा है, इसलिए इस पैसे का उपयोग जल संरक्षण या फसल विविधीकरण जैसे दूसरे अहम कार्यों के लिए आसानी से नहीं किया जा सकता।

एग्रीस्टैक के तहत खाद का कोटा एक समान करना सही कदम नहीं
जानकारों ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि एग्रीस्टैक और किसान आईडी जैसी डिजिटल प्रणालियां में पहले कुछ बुनियादी सुधार करने होंगे। नीति पत्र के अनुसार, सबसे पहले उर्वरक का अधिकार किसानों की असल जरूरत के आधार पर तय होना चाहिए। पूरे देश में एक समान आवंटन भारत की भौगोलिक और कृषि विविधता के अनुकूल नहीं होगा। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रणाली को उस व्यक्ति की पहचान करनी चाहिए जो वास्तव में खेत जोत रहा है। जहां जमीन का मालिक और खेती करने वाला व्यक्ति अलग-अलग हैं, वहां सिर्फ जमीन के मालिकाना हक के आधार पर उर्वरक सहायता नहीं दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि यह सहायता मौसम और परिस्थितियों के अनुसार बदलनी चाहिए। फसल का चुनाव, खेती का रकबा और अन्य स्थितियां हर मौसम में बदल सकती हैं, इसलिए डिजिटल प्रणाली को इसे एक तय वार्षिक आवंटन मानने के बजाय बार-बार अपडेट करने में सक्षम होना चाहिए। इसके साथ ही, डेटा की गुणवत्ता, किसानों की सहमति, निजता, शिकायत निवारण और जमीन या फसल के गलत रिकॉर्ड को सुधारने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय होने चाहिए। रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि जब ये बुनियादी ढांचें पूरी तरह से मजबूत हो जाएं, केवल तभी भारत सरकार को यह विचार करना चाहिए कि किसानों को सीधे नकद हस्तांतरण की व्यवस्था मौजूदा सब्सिडी ढांचे की जगह कैसे ले सकती है।


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