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Jammu And Kashmir Farmer Debt Risen 86 Three Years Srinagar Having Highest Outstanding Per Farmer
जम्मू-कश्मीर : किसानों पर तीन साल में 86 फीसदी बढ़ा कर्ज, श्रीनगर में प्रति किसान बकाया सबसे ज्यादा
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Mon, 28 Sep 2026 06:42 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में कर्जदार किसानों की संख्या तीन साल में 6.69 लाख से बढ़कर 8.54 लाख हो गई। इसी दौरान कुल बकाया कृषि कर्ज करीब 86% बढ़कर 14,407.48 करोड़ रुपये पहुंच गया।
जम्मू-कश्मीर में कर्जदार किसानों की संख्या के साथ उनका कृषि कर्ज भी तेजी से बढ़ा है। विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में 6.69 लाख कर्जदार किसानों की तुलना में 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 8.54 लाख हो गई। इसी अवधि में किसानों पर बकाया कृषि कर्ज करीब 86 फीसदी बढ़कर 14,407.48 करोड़ रुपये पहुंच गया।
कृषि उत्पादन विभाग की ओर से विधानसभा में दिए गए जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, एक कर्जदार किसान पर औसत बकाया कर्ज भी बढ़ा है। यह 2023-24 में करीब 1.15 लाख रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1.69 लाख रुपये हो गया। यानी औसत कर्ज में करीब 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
एक साल में भी बढ़ा कर्ज
आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में जम्मू-कश्मीर में 8,12,496 किसान कर्जदार थे। इन किसानों पर कुल 10,733.21 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज बकाया था। इस दौरान प्रति किसान औसत कर्ज 1,32,101.69 रुपये था। 2025-26 में कर्जदार किसानों की संख्या बढ़कर 8.54 लाख और कुल बकाया कर्ज 14,407.48 करोड़ रुपये हो गया।
जम्मू जिले में सबसे ज्यादा बकाया कर्ज
2025-26 में जम्मू जिले में सबसे ज्यादा 1,662.63 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज बकाया था। यहां 70,697 किसान कर्जदार थे। प्रति किसान औसत कर्ज करीब 2.35 लाख रुपये रहा। इसके बाद बारामुला में 1,494.76 करोड़ रुपये और पुलवामा में 1,389.36 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज बकाया था। बारामुला में 73,004 और पुलवामा में 62,315 किसान कर्जदार थे।
अनंतनाग में कर्जदार किसानों की संख्या सबसे ज्यादा 74,679 रही। यहां किसानों पर कुल 1,318.45 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज बकाया था। शोपियां में 985.87 करोड़, बडगाम में 970.17 करोड़ और कुलगाम में 882.16 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज बकाया था। कुपवाड़ा में 812.17 करोड़, कठुआ में 668.86 करोड़, राजौरी में 562.68 करोड़ और सांबा में 430.98 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था।
श्रीनगर में प्रति किसान औसत कर्ज सबसे ज्यादा
श्रीनगर में कुल बकाया कृषि कर्ज 717.58 करोड़ रुपये था और 13,493 किसान कर्जदार थे। यहां प्रति किसान औसत कर्ज 5.31 लाख रुपये रहा, जो आंकड़ों में शामिल जिलों में सबसे अधिक है।
किसानों को कर्ज के बोझ से राहत के लिए कई योजनाएं
सरकार ने बताया कि किसानों का वित्तीय बोझ कम करने और संस्थागत कर्ज तक उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), ब्याज सहायता योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) शामिल हैं। इसके अलावा कृषि इनपुट, कृषि मशीनरी, सिंचाई और दूसरी कृषि गतिविधियों के लिए केंद्र और जम्मू-कश्मीर की योजनाओं के तहत भी किसानों को सहायता दी जा रही है। कृषि उत्पादन विभाग वित्तीय संस्थानों और स्थानीय स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों को संस्थागत कर्ज और अन्य पात्र वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है।
बाजार तक सीधी पहुंच बनाने पर जोर
सरकार ने कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को बेहतर खरीदार और कीमत उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है।किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को सीधे खरीदारों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने के साथ उपज की ग्रेडिंग, छंटाई, पैकेजिंग और सामूहिक बिक्री को बढ़ावा देने की कोशिश है।
सरकार के अनुसार, ई-मार्केटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने से किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच और फसल की कीमत तय करने में अधिक पारदर्शिता मिल सकती है। इन उपायों का उद्देश्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और किसानों की आय में सुधार करना है। सरकार ने अपने जवाब में कर्जदार किसानों की संख्या बढ़ने के पीछे किसी एक प्रमुख कारण को स्पष्ट रूप से नहीं बताया है। साथ ही, उसने किसानों के लिए लागू वित्तीय सहायता और कृषि योजनाओं को कर्ज का बोझ कम करने के उपायों के रूप में बताया है।
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