जम्मू-कश्मीर में किसानों और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए चल रही AgriStack योजना में अभी पूरी तरह लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है। केंद्र शासित प्रदेश में जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है, लेकिन AgriStack के तहत जमीन के प्लॉट की मंजूरी और किसान आईडी बनाने का काम अभी पीछे चल रहा है।
मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सामने आया कि प्रदेश में चिन्हित जमीन के कुल 71,04,737 खसरा नंबरों में से अब तक 65,77,944 का डेटा दर्ज किया गया है। इनमें 58,17,502 खसरों का सत्यापन हो चुका है, जबकि 57,30,681 खसरों को मंजूरी मिली है। यानी करीब 80.7 फीसदी जमीन के रिकॉर्ड ही AgriStack में मंजूर हो पाए हैं।
13.74 लाख खसरे अभी मंजूर नहीं
समीक्षा के दौरान सामने आया कि करीब 13.74 लाख खसरे अभी AgriStack के मंजूर रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाए हैं। इनमें 5.26 लाख से ज्यादा ऐसे जमीन के रिकॉर्ड हैं, जिनका डेटा ही अभी दर्ज नहीं हुआ था। सरकार का लक्ष्य सभी पात्र किसानों और उनकी जमीन को AgriStack से जोड़ना है। इसके लिए सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
1.21 लाख Farmer ID ही बनीं
AgriStack के तहत किसान की पहचान के लिए Farmer ID बनाई जा रही है। लेकिन अभी तक जम्मू-कश्मीर में केवल 1,21,472 Farmer ID ही तैयार हो पाई हैं। ये आईडी 1,663 गांवों में बनाई गई हैं। यह आंकड़ा 71 लाख से ज्यादा खसरा रिकॉर्ड के मुकाबले काफी कम है। सरकार ने उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि सभी पात्र किसानों को Farmer ID से जोड़ा जाए। अधिकारियों को यह प्रमाणित करने के लिए भी कहा गया है कि कोई पात्र किसान योजना से बाहर न रह जाए।
जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण पूरा
समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों, 207 तहसीलों और 6,818 गांवों में जमीन के मूल रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया गया है। हालांकि, केवल जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करना और AgriStack के तहत हर जमीन के प्लॉट को मंजूरी देना अलग-अलग प्रक्रिया है। जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण पूरा होने के बावजूद प्लॉट की मंजूरी और Farmer ID बनाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है।
खरीफ फसल सर्वे 96.55 फीसदी पूरा
इस बीच खरीफ 2026 के डिजिटल क्रॉप सर्वे में अच्छी प्रगति हुई है। अब तक 5,714 गांवों में 30,61,696 कृषि प्लॉट का सर्वे किया जा चुका है। यह तय लक्ष्य का 96.55 फीसदी है। इनमें से 27,27,189 प्लॉट का पर्यवेक्षकों ने सत्यापन और मंजूरी भी कर दी है।
52 हजार से ज्यादा गांवों में ULPIN का विस्तार
जमीन की डिजिटल पहचान के लिए ULPIN यानी यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर भी जारी किए जा रहे हैं। 25 सितंबर तक 5,275 गांवों में 33,47,011 ULPIN जारी किए जा चुके थे। ULPIN से जमीन के हर टुकड़े की एक अलग डिजिटल पहचान तैयार होती है। इससे जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था में जोड़ने और उसकी पहचान आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल जमीन रिकॉर्ड से आसान हो सकता है कर्ज
प्रशासन अब डिजिटल जमीन रिकॉर्ड को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस से जोड़ने पर भी विचार कर रहा है। इससे सत्यापित जमीन और किसान के डेटा का इस्तेमाल औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था के जरिए कर्ज देने में किया जा सकता है।
सरकार ने अधिकारियों को ऐसे मामलों को भी जल्द सुलझाने के निर्देश दिए हैं, जिनमें किसान रिकॉर्ड का दावा नहीं कर रहे हैं या एक ही जमीन का रिकॉर्ड एक से ज्यादा जिलों से जुड़ा हुआ है। इन समस्याओं को दो महीने के भीतर दूर करने को कहा गया है।
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