हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में रबी फसलों की बुवाई से जुड़ी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के अनुसार, किसान मौसम और अपने क्षेत्र का ध्यान रखते हुए 15 अक्तूबर से गेहूं, चना, मटर और कई तरह की सब्जियों की बुवाई शुरू कर सकते हैं।समय पर बुवाई और सही किस्म का चुनाव फसल के विकास में काफई फायदेमंद होता है।
गेहूं की अगेती किस्मों की बुवाई करें, ये काम करना न भूलें
प्रदेश के पहाड़ी इलाकों से आने वाले किसान अक्तूबर के पहले पखवाड़े में गेहूं की अगेती किस्मों की बुवाई कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने किसानों को एचएस-542, एचपीडब्ल्यू-360 और वीएल-829 जैसी किस्मों का सुझाव दिया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि रोगों ेक प्रकोप से बचने के लिए बुवाई से पहले बेविस्टिन, वीटावेक्स या रैक्सिल से बीजों का उपचार करें।
चने की बुवाई का समय और किस्में
रबी में चने की खेती करने वाले किसान 15 अक्तूबर से बुवाई का काम शुरू कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने हिमाचल चना-1, हिमाचल चना-2, जीपीएफ-2 और एचपीजी-17 जैसी किस्मों का सुझाव दिया है। ध्यान रहे कि बीज की बुवाई जमीन के 10 से 12.5 सेंटीमीटर अंदर होनी चाहिए। विल्ट रोग से बचने में बेविस्टिन और थीरम से बीज उपचार करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
गेहूं संग उगाएं राया, सब्जियों के लिए मुफीद समय
प्रदेश के निचले और मौदानी इलाकों में राया की आरसीसी-प और करण राई किस्मों के खेती की सलाह दी गई है। खास बात यह है कि इस फसल को एकल या सहफसली मॉडल के तहत गेहूं के साथ बोया जा सकता है। इस समय निचले इलाकों में मटर की अगेती किस्मों जैसे पालम त्रिलोकी, अरकल, वीएल-7 और मटर अगेती की बुवाई की जा सकती है।
मटर संग इन सब्जियों के लिए मुफीद समय
मटर के अलावा पालक, मेथी, मूली, गाजर, शलजम और लहसुन की बुवाई के लिए यह समय काफी अच्छा है। मध्यवर्ती पहाड़ी इलाकों से आने वाले किसान फूलगोभी से लेकर बंदगोभई और ब्रॉकली तक की रोपाई कर सकते हैं। फसल की अच्छी बढ़त के लिए गुड़ाई के समय जड़ों के पास नाइट्रोजन डालने को भी कहा गया है।
गोभी वर्ग की फसलों में ये ध्यान दें
गोभी वर्ग की फसलों के नर्सरी तैयार करने से पहले मिट्टी की जांच कराएं। पौध की रोपाई से 20 दिन पहले क्यारियों को फॉर्मेलिन और पानी के घोल से उपचारित करें। कटुआ कीट से होने वाले नुकसान से बचने के लिए पौधे के पास क्लोरपाइरिफॉस 20 ईसी के घोल से सिंचाई करें। तिलहन फसलों में कीटों को काबू में लाने के लिए साइपरमेथ्रिन, मिथाइल डेमेटॉन या डाइमिथोएट के घोल के छिड़काव सुझाया गया है।