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Indian Tea Will Now Be Exported To The Us Without Tax Giving China A Tough Competition Exporters Hopeful
Tea Export: भारतीय चाय अब बिना शुल्क अमेरिका जाएगी, चीन को मिलेगी कड़ी टक्कर; निर्यातकों की जगी उम्मीद...
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Saraswat
Updated Tue, 10 Feb 2026 12:06 PM IST
सार
भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते से भारतीय चाय उद्योग के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। इस समझौते के तहत अब भारतीय चाय को अमेरिकी बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी बाजार में भारतीय चाय की शुल्क मुक्त पहुंच से चीन को मिलेगी कड़ी टक्कर।
- फोटो : Ai
भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते से भारतीय चाय उद्योग के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। इस समझौते के तहत अब भारतीय चाय को अमेरिकी बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
चीन से मुकाबले में भारत को मिलेगी बढ़त
चाय निर्यातकों का मानना है कि शुल्क मुक्त सुविधा मिलने से भारतीय चाय अब अमेरिकी बाजार में चीन की चाय को कड़ी टक्कर दे पाएगी। इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अंशुमन कनोरिया के अनुसार, चीन अमेरिका में हमारा बड़ा प्रतिस्पर्धी है। अब हमारे पास शुल्क (Duty) का लाभ है। भारतीय चाय के लिए शून्य शुल्क होने से वहां लंबी अवधि की साझेदारी और योजना बनाना आसान हो जाएगा।
लेकिन, जानकारों का कहना है कि अमेरिका चाय के लिए एक कीमत-संवेदनशील बाजार है और वहां मांग बहुत तेजी से नहीं बढ़ रही है, इसलिए बहुत कम समय में निर्यात में भारी उछाल की उम्मीद नहीं है, लेकिन पुराने स्तर को वापस पाने में मदद जरूर मिलेगी।
50% टैक्स की मार से मिली आजादी
पिछले साल भारतीय चाय निर्यातकों के लिए काफी मुश्किल समय था। अमेरिका में भारतीय चाय पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम शुल्क लगा दिया गया था। इस वजह से कई अमेरिकी खरीदारों ने अपने ऑर्डर रद्द कर दिए थे और निर्यातकों को अपने वादे पूरे करने के लिए मजबूरन भारी छूट देनी पड़ी थी। साल 2025 में चाय के निर्यात की मात्रा में गिरावट दर्ज की गई थी।
अब जीरो ड्यूटी होने से निर्यातक राहत की सांस ले रहे हैं। दक्षिण भारत चाय निर्यातक संघ के अध्यक्ष दीपक शाह ने कहा कि बीमार चल रहे चाय उद्योग के लिए यह फैसला संजीवनी की तरह है। अब हम उस बाजार को वापस पा सकते हैं जो ऊंची दरों के कारण हाथ से निकल गया था।
2 करोड़ किलो निर्यात का लक्ष्य
आंकड़ों बताते हैं कि अमेरिका भारतीय चाय के कुल निर्यात का लगभग 5 से 7 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है। वहां अधिकतर आइस टी और रेडी-टू-ड्रिंक की मांग ज्यादा है। पिछले साल भारत ने अमेरिका को 1.52 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया था।
बागान मालिकों की कमाई सुधरने की उम्मीद
युनाइटेड प्लान्टर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया के अध्यक्ष अजय थिपैया ने इस समझौते को बागान क्षेत्र के लिए एक बेहद जरूरी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल चाय, बल्कि कॉफी, प्राकृतिक रबर और मसालों के लिए भी बाजार के रास्ते खुलेंगे। इस कदम से पूरे बागान उद्योग से जुड़े लोगों की आमदनी बढ़ने की संभावना है।
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