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शहरों से ज्यादा गांवों पर महंगाई का साया : ग्रामीण खाद्य महंगाई 8.06% पर, 108% तक उछलकर प्याज ने बिगाड़ा खेल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 29 Oct 2026 07:27 PM IST
सार

  • सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54% और खाद्य महंगाई 7.74% पर पहुंची
  • ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 6.08%, जबकि शहरों में 4.88% रही
  • प्याज के दाम सालाना आधार पर 108%, चीनी के 30% और गुड़ के 23% बढ़े
  • नई फसल की आवक में देरी और गन्ने में रेड रॉट बीमारी से खाद्य कीमतों पर दबाव
  • थोक महंगाई बढ़कर 11.39% पर पहुंची, ईंधन और बिजली श्रेणी में 25.85% की महंगाई दर्ज

खाद्य महंगाई ने शहरों से ज्यादा ग्रामीण भारत के रसोई बजट पर ज्यादा असर डाला।
खाद्य महंगाई ने शहरों से ज्यादा ग्रामीण भारत के रसोई बजट पर ज्यादा असर डाला। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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सितंबर महीने के दौरान प्रमुख खाद्य उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा रहा है। अक्टूबर मंथली इकोनॉमिक रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, प्याज के दोगुने से अधिक बढ़े दामों और चीनी, खाद्य तेल और चावल की बढ़ती कीमतों के चलते सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई, जो पिछले महीने के मुकाबले 71 अंक अधिक है। इस दौरान खाद्य महंगाई भी बढ़कर 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिससे आम परिवारों के घरेलू बजट पर सीधा दबाव पड़ा है।

शहरों के मुकाबले गांवों में महंगाई का ज्यादा असर
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई में हुई यह बढ़ोतरी सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं रही है। सितंबर में ग्रामीण खुदरा महंगाई 6.08 प्रतिशत रही, जबकि शहरों में यह 4.88 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, भोजन की महंगाई की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में यह 8.06 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि शहरी केंद्रों में यह 7.18 प्रतिशत रही। यह अंतर इसलिए दिखाई दे रहा है क्योंकि ग्रामीण परिवारों के रोजमर्रा के कुल खर्च में भोजन की वस्तुओं पर खर्च का हिस्सा शहरों से कहीं अधिक होता है।

प्याज के दाम दोगुने से ज्यादा बढ़े
खाद्य महंगाई को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका प्याज की रही, जिसके दाम पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 108 प्रतिशत बढ़ गए। इसके अलावा चीनी के भाव 30 प्रतिशत और गुड़ के दाम 23 प्रतिशत तक चढ़ गए हैं। तेल के बाजार में रिफाइंड तेल की कीमतें 15 प्रतिशत और मूंगफली के तेल के दाम 14 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि चावल के भाव में 8 प्रतिशत की तेजी आई है।

कम स्टॉक, देरी से आवक और फसलों की बीमारी
रिपोर्ट के अनुसार, जरूरी चीजों की आपूर्ति में आई रुकावटों की वजह से यह कीमतें बढ़ी हैं। पिछली रबी फसल का प्याज का बचा हुआ स्टॉक अब कम पड़ रहा है, जबकि नई खरीफ फसल की बाजार में आवक लगभग एक महीना पिछड़ गई है। उधर चीनी के मामले में अधिक बारिश और 'रेड रॉट' (लाल सड़न) बीमारी के कारण गन्ने की फसल खराब होने से उत्पादन घटा है। आगामी त्योहारों की भारी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की सीमित आपूर्ति ने भी कीमतों को ऊपर खींचने का काम किया है।

खाड़ी देशों की मांग से चावल पर दबाव
समीक्षा रिपोर्ट में बताया गया है कि चावल के दामों में आई तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मांग एक बड़ा कारण रही है। भारतीय चावल की विदेशी बाजारों, विशेष रूप से खाड़ी देशों में मांग काफी बढ़ गई है, जिससे घरेलू स्तर पर चावल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है।

थोक महंगाई और ईंधन के दामों में बड़ा उछाल
खाने-पीने के खुदरा उत्पादों संग थोक बाजार में भी लागत का भारी दबाव सामने आया है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त के 9.92 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई। थोक बाजार में ईंधन और बिजली वाली श्रेणी में महंगाई की रफ्तार 25.85 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि तैयार (मैन्युफैक्चर्ड) उत्पादों की महंगाई बढ़कर 9.76 प्रतिशत हो गई है।

समीक्षा के अनुसार,  अगर जरूरी चीजों के दाम और थोक लागत का यह दबाव आगे भी बना रहा, तो महंगाई का संकट और बढ़ सकता है। वैश्विक स्तर पर भी खाद्य मूल्य सूचकांक एक साल पहले की तुलना में 5.8 प्रतिशत ऊंचा बना हुआ है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि दाम उन चीजों के सबसे ज्यादा बढ़े हैं जिन्हें परिवार रोज खरीदते हैं। 
 


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