युद्ध की वजह से ईरान को होने वाले भारतीय चाय के निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। इस नुकसान की भरपाई के लिए भारत सरकार अब चाय निर्यातकों के लिए नए बाजारों की तलाश कर रही है और उन्हें बढ़ावा दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमित कुमार का कहना है कि सरकार ओमान जैसे बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, क्योंकि वहां भारतीय चाय की खरीदारी बढ़ रही है।
ओमान बन रहा है चाय का नया बाजार
संयुक्त सचिव अमित कुमार के अनुसार, सरकार वर्तमान आंकड़ों का विश्लेषण कर रही है और यह सामने आया है कि भारत से ओमान को होने वाले चाय निर्यात में काफी वृद्धि हुई है। चाय के बढ़ते आयात और इसे लेकर बागान मालिकों (उत्पादकों) द्वारा उठाई गई चिंताओं के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य ध्यान निर्यात को अलग-अलग बाजारों तक बढ़ाने और निर्यातकों के लिए नए बाजार तैयार करने पर है।
निर्यात घटा, जबकि आयात में हुआ इजाफा
ाोीयूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया (उपासी) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जनवरी से जुलाई के बीच भारत ने 153.24 मिलियन किलो चाय का निर्यात किया था। वहीं, इस साल जनवरी से जून के बीच इसमें 16.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 128.56 मिलियन किलो रह गया है।
दूसरी तरफ, देश में चाय के आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच भारत ने 15.1 मिलियन किलो चाय का आयात किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि (जनवरी से जून) में यह आंकड़ा 10 मिलियन किलो था।
चाय उत्पादकों ने जताई गहरी चिंता
देश में चाय के बढ़ते आयात को लेकर घरेलू चाय उत्पादकों ने अपनी चिंता व्यक्त की है। बुधवार को कुन्नूर में आयोजित 'उपासी' (UPASI) की वार्षिक बैठक में संस्था के निवर्तमान अध्यक्ष अजॉय थिप्पैया ने कहा, "आयातित चाय की आवक में यह नई वृद्धि घरेलू उद्योग के लिए चिंता का विषय है।" उन्होंने मांग की है कि भारतीय चाय उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उचित और सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।