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Home› Khabar Junction› Indian Rice Is Significantly Cheaper Than Rice From Thailand Or Vietnam It Has Found Favor With African Buyer

थाईलैंड-वियतनाम से काफी सस्ता है भारतीय चावल : अफ्रीकी खरीदारों को आया पसंद, नई आवक से निर्यात दरें स्थिर...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 30 Oct 2026 09:40 AM IST
सार

  • वियतनाम में चावल की कीमतें जनवरी 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं
  • घरेलू आपूर्ति में कमी के चलते 5% टूटे चावल के भाव 470-480 डॉलर प्रति टन हुए
  • भारत में नए धान की आवक बढ़ने से निर्यात कीमतें स्थिर बनी हुई हैं
  • अफ्रीकी खरीदार थाईलैंड और वियतनाम के मुकाबले सस्ते भारतीय चावल को तरजीह दे रहे हैं

 

बीते दिनों में प्रमुख उत्पादक देशों में चावल की निर्यात कीमतों में तेजी आई है।
बीते दिनों में प्रमुख उत्पादक देशों में चावल की निर्यात कीमतों में तेजी आई है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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चावल की निर्यात कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है, जैसे सप्लाई में सुस्ती की वजह से वियतनाम में चावल के भाव जनवरी 2025 के बाद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। दूसरी तरफ भारत इस मामले में नई फसल के दम पर स्थिरता दिखा रहा है। हालांकि इस हफ्ते भारतीय चावल का निर्यात भाव एक साल के अधिक के रिकॉर्ड स्तर के करीब बने रहे हैं।

वियतनाम में कम आपूर्ति से उछले भाव
वियतनाम में 5 प्रतिशत टूटे चावल की कीमत गुरुवार को बढ़कर 470 से 480 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई, जो पिछले हफ्ते 440 से 450 डॉलर प्रति टन थी। हो ची मिन्ह सिटी के एक व्यापारी ने बताया कि देश के भीतर चावल की घरेलू आपूर्ति बेहद कम है। व्यापारियों के अनुसार, वहां अगली फसल की कटाई नवंबर के अंत से पहले शुरू नहीं होगी और इस बार उत्पादन पिछली फसल के मुकाबले आधा ही रहने का अनुमान है।

अल-नीनो और फिलीपींस से मांग बढ़ने की संभावना
व्यापारियों का कहना है कि अगले साल से अल-नीनो मौसम का असर भी धान के उत्पादन पर पड़ने की पूरी आशंका है। इसके अलावा जानकारों का मानना है कि अगले महीने से वियतनाम के चावल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि फिलीपींस द्वारा वियतनाम से दोबारा चावल की खरीद शुरू करने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत में नए धान की आवक से बाजार स्थिर
भारत में इस हफ्ते 5 प्रतिशत टूटे उबले चावल का भाव 387 से 392 डॉलर प्रति टन पर बिना किसी बदलाव के स्थिर रहा। वहीं, भारत के 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल की कीमत 389 से 394 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई। कोलकाता के एक निर्यातक ने बताया कि उत्तर भारत के राज्यों में नए सीजन के धान की आवक बढ़नी शुरू हो गई है, जबकि अगले महीने से मध्य और दक्षिण भारत के राज्यों से भी मंडियों में आवक बढ़ने की उम्मीद है।

थाईलैंड में बाढ़ और घरेलू कीमतों का असर
थाईलैंड के 5 प्रतिशत टूटे चावल की कीमत इस हफ्ते 480 डॉलर प्रति टन पर बनी रही, जिसमें पिछले हफ्ते की तुलना में कोई बदलाव नहीं हुआ। व्यापारियों के मुताबिक, मुद्रा विनिमय दर और देश के भीतर मजबूत कीमतों की वजह से वहां भाव थमे हुए हैं। एक अन्य व्यापारी ने बताया कि फसल कटाई के दौरान कुछ इलाकों में आई बाढ़ के चलते आने वाले दिनों में आपूर्ति को लेकर असमंजस बना हुआ है।

सस्ते भारतीय चावल को चुन रहे अफ्रीकी खरीदार
बैंकॉक के एक व्यापारी ने बताया कि फिलीपींस और कुछ नियमित ग्राहक थाईलैंड से चावल खरीद रहे हैं, लेकिन अफ्रीका जैसे बड़े बाजारों ने भारत के अपेक्षाकृत सस्ते चावल को तरजीह दी है। भारत के दाम थाईलैंड और वियतनाम की तुलना में कम होने से कई आयातक देश भारतीय माल की ओर रुख कर रहे हैं।

बांग्लादेश में महंगे तेल से बढ़ी लागत
पड़ोसी देश बांग्लादेश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद स्थानीय बाजार में चावल के दाम ऊंचे बने हुए हैं। वहां कच्चे तेल और ईंधन की ऊंची कीमतों ने खेती की लागत और गाड़ियों का भाड़ा काफी बढ़ा दिया है, जिससे चावल की कीमतें नीचे नहीं आ पा रही हैं और आम उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार पड़ रही है।


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