वियतनाम से आने वाली बासा मछली भारत में तेजी से अपनी जगह बना रही है। गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय बसा मछली का खुदरा भाव 250 रुपये से 600 रुपये प्रति किलो तक है, वहीं, वियतनाम से फ्रोजन अवस्था में आने वाली इसी मछली का थोक और खुदरा दाम 170 रुपये से 400 रुपये प्रति किलो के बीच है।
कम दाम और अच्छी सप्लाई के कारण होटल-रेस्तरां और शादी-पार्टियों में वियतनाम की बासा मछली को तेजी से जगह मिल रही है। यह चलन घरेलू मछली पालकों के लिए बड़ी चुनौती है। व्यापारियों का कहना है कि भारत में बासा मछली पालन की ज्यादा लागत और उत्पादन क्षमता में कमी ने इसे वियतनाम की तुलना में महंगा किया है।
लगातार बढ़ रहा है विदेश से बासा मछली का आयात
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में बासा मछली का आयात लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का कुल बासा आयात 14.3 प्रतिशत बढ़कर 1.83 करोड़ डॉलर हो गया, जो इससे पिछले साल 1.60 करोड़ डॉलर था। अकेले वियतनाम से होने वाला आयात वित्तीय वर्ष 2025-26 में 13.7 प्रतिशत बढ़कर 1.82 करोड़ डॉलर हो गया।
वजन के हिसाब से देखें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में वियतनाम से 11,329 टन बासा मछली भारत आई, जो पिछले साल 10,109 टन थी। चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती चार महीनों भी यह मांग कम नहीं हुई है और आयात में 19.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। भारत अपनी जरूरत की लगभग पूरी विदेशी बासा मछली वियतनाम से ही मंगाता है। साल 2025-26 में थाईलैंड और सऊदी अरब से भी बहुत थोड़ी मात्रा में यह मछली मंगाई गई थी।
होटल और रेस्तरां में क्यों है इतनी मांग?
जानकारों के अनुसार, वियतनाम से बासा आयात सस्ता होता है, वहीं, सप्लाई भी आच्छी है। इसके अलावा भारतीय ग्राहक और खाद्य उद्योग बिना कांटने वाली मछली को प्राथमिकता देता है, जिसकी वजह से भी होटल से लेकर कैफै तक में इसकी मांग सबसे ज्यादा है।
भारत के घरेलू उत्पादकों पर असर
केन रिसर्च के अनुसार, साल 2025 में भारत का घरेलू मछली बाजार 45.8 अरब डॉलर का था। दुनिया के कुल मछली उत्पादन में 8% हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश का कुल मछली उत्पादन 1.97 करोड़ टन था।
आयातकों का कहना है कि हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मछली उत्पदाक देश है। हमारी घरेलू पैदावार काफी और हम ज्यादा आयात नहीं करते। लेकिन वियतनाम की बासा मछली भारतीय बासा और दूसरी मछलियों के मुकाबले सस्ती है, जिसे वजह से इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात होने वाली इस सस्ती मछली से भारत के घरेलू मछली पालकों को भविष्य में कड़ी टक्कर मिल सकती है।