पशु चारे की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से पोल्ट्री उद्योग और डेयरी किसान परेशानी का सामना कर रहे हैं। चारा बनाने में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल की कीमतों मं 75 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है। पशु चारे में मक्का एक प्रमुख उत्पाद होता है। उद्योग संगठन सरकार ने मक्के के आयात को आसान बनाने की अपील कर रहे हैं।
पशु चारे की कीमतों में यह बढ़ोतरी मात्र लागत के नजरिए से किसानों के लिए चुनौती नहीं है। बाजार में मांग कमजोर होने की वजह से मुर्गी पालक और डेयर किसान बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहे हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पोल्ट्री किसानों 15 प्रतिशत का नुकसान, चारे की उपलब्धता चुनौती
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, लागत बढ़ने के कारण पोल्ट्री किसानों को लगभग 15 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर सूखा प्रभावित इलाकों में डेयरी किसानों को पशुओं के लिए चारा जुटाने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चारे की बढ़ती कीमतों के कारण चारा बनाने वाली कंपनियों (मैन्युफैक्चरर्स) का मुनाफा भी कम हो गया है, क्योंकि बाजार में चारे की मांग घट गई है।
सरसों की खली से चावल की भूसी तक महंगी
आंकड़ों के अनुसार, चारे में इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं। सरसों खली की कीमत में 75%, डी-ऑयल्ड राइस ब्रान मील (चावल की भूसी) में 68%, कॉर्न डीडीजीएस में 66%, मूंगफली के मील में 43% और मक्के की कीमत में 8% की बढ़ोतरी हुई है।
सरकार से मक्के का आयात आसान करने की अपील
कमजोर मानसून के कारण इस साल मक्के के उत्पादन में गिरावट आई है। इसके चलते मक्के की हिस्सेदारी हासिल करने के लिए पोल्ट्री उद्योग और इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों के बीच होड़ (प्रतिस्पर्धा) बढ़ गई है। इस संकट को देखते हुए, उद्योग संगठनों ने सरकार से अपील की है कि मक्के के आयात (विदेशों से मक्का मंगाने की प्रक्रिया) को आसान बनाया जाए। इसके अलावा, संगठनों ने सरकार से यह भी मांग की है कि इंसानों के खाने के अयोग्य हो चुके अनाज (खराब अनाज) को पशुचारे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए जारी किया जाए।