सरकार पीएम-कुसुम (PM KUSUM) का विस्तार करने की योजना बना रही है। योजना के अगले चरण यानी पीएम-कुसुम 2.0 में सोलर पंप का इस्तेमाल करने वाले किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणालियां अपनाने और अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस योजना को सफल बनाने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और कृषि मंत्रालय एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि प्रस्तावित पीएम-कुसुम 2.0 को मौजूदा कृषि योजनाओं के साथ जोड़ा जा सके।
कैबिनेट से मंजूरी की तैयारी
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी के अनुसार, इन विचारों पर अभी काम चल रहा है। एक बार जब हम अपनी तैयारी पूरी कर लेंगे, तो इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास ले जाएंगे। सारंगी ने बताया कि पीएम-कुसुम 2.0 का सबसे बड़ा लक्ष्य किसानों के फायदे को अधिकतम करना है।
सचिव के अनुसार, कृषि मंत्रालय किसानों के लिए अधिक मुनाफे वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाता है। उन्होंने बताया कि दोनों मंत्रालयों के बीच इन पहलों को एक साथ जोड़ने के लिए चर्चा चल रही है।
क्या है मौजूदा पीएम-कुसुम योजना के फायदे?
पीएम-कुसुम योजना का मुख्य उद्देश्य खेती में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसके तहत वर्तमान में तीन मुख्य हिस्से (कंपोनेंट) शामिल हैं।
कंपोनेंट ए के तहत किसान 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता वाले सोलर प्लांट लगा सकते हैं और बिजली वितरण कंपनियों को बिजली बेचकर कमाई कर सकते हैं। कंपोनेंट बी में जिन किसानों के इलाके में पक्की बिजली की सुविधा नहीं है, उन्हें 7.5 एचपी (HP) तक के स्टैंडअलोन (स्वतंत्र) सोलर पंप दिए जाते हैं। कंपोनेंट सी के तहत बिजली ग्रिड से जुड़े मौजूदा सिंचाई पंपों को सोलर पंप में बदला जाता है। इससे किसान अपनी जरूरत पूरी करने के बाद बची हुई अतिरिक्त बिजली को वापस ग्रिड में बेच सकते हैं।
इसके अलावा, मौजूदा योजना में 'फीडर-स्तर के सौरीकरण' की भी सुविधा है। इसमें एक बड़े सोलर प्लांट से फीडर के जरिए कई कृषि पंपों को एक साथ बिजली दी जाती है।
एक ही जमीन पर खेती और बिजली उत्पादन
पिछले महीने, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया था कि योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टिक्स (Agrivoltaics) के लिए एक अलग और विशेष हिस्सा जोड़ा जाएगा। एग्रीवोल्टिक्स का सीधा मतलब है कि किसान एक ही जमीन का इस्तेमाल अपनी सामान्य खेती करने और साथ ही साथ सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने के लिए कर सकेंगे।
सरकार के अनुसार, यह एग्रीवोल्टिक्स प्रणाली किसानों को पैदा की गई बिजली से अतिरिक्त कमाई करने में मदद करेगी। इस पहल का मुख्य फोकस छोटे और सीमांत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और ग्राम पंचायतों पर होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में जमीन का मालिकाना हक पूरी तरह से किसान के पास ही सुरक्षित रहेगा।