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पीएम-कुसुम : बबूल के पेड़ों में उलझी किसानों की सौर योजना, इस राज्य में 22 करोड़ का अटका प्रोजेक्ट

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 18 Oct 2026 07:19 PM IST
सार

  • कर्नाटक के उडुपी जिले में 22 करोड़ रुपये की सौर ऊर्जा परियोजना अटकी।

  • पीएम-कुसुम योजना के तहत तीन जगहों पर सौर ऊर्जा संयंत्र बनाने के लिए जमीन चिह्नित की गई है।

  • किरीमंजेश्वर में 13 एकड़, कावड़ी में 7.5 एकड़ और बेल्ले गांव में 10 एकड़ जमीन तय की गई है।

  • जमीन पर खड़े बबूल के पेड़ों को हटाने में देरी से परियोजना का काम प्रभावित हो रहा है।

पीएम कुसुम योजना
पीएम कुसुम योजना - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कर्नाटक के उडुपी जिले में बबूल के पेड़ों को हटाने में देरी के कारण किसानों के लिए शुरू होने वाली 22 करोड़ रुपये की सौर ऊर्जा परियोजना अटक गई है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के घटक-सी के तहत जिले में तीन जगह सौर ऊर्जा संयंत्र बनाए जाने हैं। हालांकि, वन विभाग की ओर से जमीन पर खड़े बबूल के पेड़ों को हटाने की कार्रवाई नहीं होने से परियोजना का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इससे किसानों को योजना का लाभ समय पर मिलने में देरी हो रही है।

उडुपी-चिक्कमगलुरु के सांसद कोटा श्रीनिवास पुजारी ने इस मामले में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को लिखित शिकायत देकर हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक देरी के कारण किसानों के हित में शुरू की गई 22 करोड़ रुपये की परियोजना प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

तीन जगहों पर बनेंगे सौर ऊर्जा संयंत्र
सांसद के मुताबिक, पीएम-कुसुम योजना के घटक-सी के तहत उडुपी जिले में तीन स्थानों पर सौर ऊर्जा संयंत्र बनाने के लिए जमीन चिह्नित की गई है।
  1. किरीमंजेश्वर : बायंदूर तालुक में 13 एकड़ जमीन।
  2. कावड़ी : ब्रह्मावरा तालुक में 7.5 एकड़ जमीन।
  3. बेल्ले गांव : कापू तालुक में 10 एकड़ जमीन।

इन तीनों स्थानों पर सौर ऊर्जा संयंत्र बनाने की योजना है। लेकिन संबंधित जमीनों पर खड़े बबूल के पेड़ों को हटाने में देरी के कारण परियोजना का काम अटका हुआ है।

केंद्र की 30% सब्सिडी पर भी संकट
कोटा श्रीनिवास पुजारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि परियोजना में देरी से किसानों को समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली 30 प्रतिशत सब्सिडी की राशि भी वापस जाने का खतरा है।

उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए कुंडापुर के विधायक ए. किरण कुमार कोडगी के साथ मुख्य सचिव शालिनी रजनीश से मुलाकात की गई थी। मुख्य सचिव ने वन विभाग के अधिकारियों को मामले का समाधान करने के निर्देश भी दिए थे।

इसके अलावा, उडुपी के उपायुक्त और वन विभाग के अधिकारियों के साथ पांच से अधिक बैठकें की जा चुकी हैं। उपायुक्त की ओर से निर्देश दिए जाने के बावजूद बबूल के पेड़ों को हटाने के मामले में अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
सांसद ने बताया कि 19 सितंबर को हेबरी में कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पर हुई सुनवाई के दौरान भी उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने दूसरे स्थानों पर सरकारी परियोजनाओं के लिए सामाजिक वानिकी की जमीन खाली कराने के उदाहरणों का हवाला देते हुए उडुपी में भी इसी तरह समाधान निकालने की मांग की थी।

कोटा श्रीनिवास पुजारी ने वन विभाग की ओर से सहयोग नहीं मिलने पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री से संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि किसानों को लाभ पहुंचाने वाली 22 करोड़ रुपये की परियोजना केवल प्रशासनिक देरी के कारण नहीं रुकनी चाहिए।
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