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मालदीव पहुंची भारत की जीआई तुअर दाल : विदेशी बाजार में किसानों को मिल रहा 30% ज्यादा दाम

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 26 Sep 2026 09:04 AM IST
सार

कर्नाटक की जीआई टैग वाली कलबुर्गी तुअर दाल की 1 मीट्रिक टन खेप मालदीव पहुंची है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस प्रीमियम दाल के किसानों को 30% से अधिक बेहतर दाम मिल रहे हैं।

तूर (अरहर)
तूर (अरहर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) की जीआई टैग वाली तुअर दाल अब मालदीव के बाजार में पहुंच गई है। भारतीय दालों की विदेशों में बढ़ती मांग से किसानों और कारोबारियों के लिए निर्यात का बाजार बढ़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, कलबुर्गी की प्रीमियम तुअर दाल की पहली खेप में 1 मीट्रिक टन दाल मालदीव भेजी गई है।

उन्होंने कहा कि इस दाल की खास गुणवत्ता और स्वाद के कारण विदेशी बाजार में मांग बढ़ रही है। गोयल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस उत्पाद की बिक्री से किसानों को उनकी उपज का 30 प्रतिशत से अधिक बेहतर दाम मिल रहा है।

चार महीने में दाल निर्यात 45% बढ़ा
भारतीय दालों की विदेशों में मांग बढ़ने का असर निर्यात के आंकड़ों में भी दिख रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत से दालों का निर्यात 45 प्रतिशत बढ़कर 452.27 मिलियन डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 311.08 मिलियन डॉलर था। मात्रा के लिहाज से भी निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत ने 4.94 लाख टन से अधिक दालों का निर्यात किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के 3.10 लाख टन से करीब 59 प्रतिशत अधिक है।

10 साल में पांच गुना बढ़ा दाल निर्यात
भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। हालांकि घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत अभी दालों का आयात भी करता है, लेकिन भारतीय दालों और उनसे बने प्रसंस्कृत उत्पादों की विदेशी बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले करीब एक दशक में भारत से दालों के निर्यात में मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है।

जीआई उत्पादों की भी बढ़ रही मांग
मूंग, काबुली चना, तुअर दाल और मसूर जैसी भारतीय दालों की चीन, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश और अमेरिका समेत कई देशों में मांग है। अब जीआई टैग वाले प्रीमियम उत्पाद भी विदेशी खरीदारों का ध्यान खींच रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि गुलबर्गा तुअर दाल की 1 मीट्रिक टन खेप मालदीव भेजी गई है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से तैयार इस प्रीमियम दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत मिल रही है। जीआई टैग किसी खास क्षेत्र से जुड़े ऐसे उत्पाद को दिया जाता है, जिसकी गुणवत्ता, पहचान या विशेषता उस क्षेत्र से जुड़ी होती है।

किसानों को विदेशी बाजार से जोड़ने का मौका
दालों के बढ़ते निर्यात से किसानों को घरेलू बाजार के अलावा विदेशी बाजार में भी अपनी उपज बेचने का अवसर मिल रहा है। खास तौर पर जीआई टैग वाले प्रीमियम उत्पादों को बेहतर कीमत मिलने से किसानों की कमाई बढ़ने की संभावना है। इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के चेयरमैन बिमल कोठारी ने बिजनेस लाइन से कहा कि भारत आने वाले वर्षों में दालों का बड़ा निर्यातक बन सकता है। इसके लिए सरकार से निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली अनुकूल नीति की जरूरत है।

करीब 60 लाख टन दाल आयात, 10 लाख टन निर्यात
कोठारी के अनुसार, भारत करीब 60 लाख टन दालों का आयात करता है, जबकि लगभग 10 लाख टन दालों का निर्यात करता है। निर्यात में कुछ प्रसंस्कृत दाल उत्पाद भी शामिल हैं। इससे दालों के आयात पर होने वाले विदेशी मुद्रा खर्च की कुछ भरपाई होती है। उन्होंने बताया कि चीन भारत से बड़ी मात्रा में मूंग खरीद रहा है। भारत मूंग के उत्पादन में आत्मनिर्भर है और उनके मुताबिक सरकार को इसके निर्यात की अनुमति जारी रखनी चाहिए।

चीन भारतीय दालों का सबसे बड़ा खरीदार
वित्त वर्ष 2025-26 में चीन भारतीय दालों का सबसे बड़ा खरीदार रहा। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, सऊदी अरब और इंडोनेशिया का स्थान रहा। विदेशी बाजार में भारतीय दालों की बढ़ती मांग से खास तौर पर जीआई टैग वाले उत्पादों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने और प्रीमियम कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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