बाजार में नई फसल के शुरुआती आवक और बारिश की कमी से पैदावार घटने की आशंका के बीच कपास की कीमतों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। पिछले हफ्ते कपास के दाम 3,000 से 4,000 रुपये प्रति कैंडी तक उछलकर लगभग 68,000 रुपये तक पहुंच गए हैं। व्यापार पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि आगामी दिनों में और अधिक कीमत मिलने की उम्मीद में किसानों ने अपनी उपज को बेचने में जल्दबाजी नहीं दिखाई है और फसल रोक कर रखी है।
CCI ने खरीद भाव बढ़ाया, 5 लाख गांठों की आवक दर्ज
भारतीय कपास निगम ने सभी राज्यों में 2025-26 की फसल के लिए अपनी नीलामी की कीमतों में 500 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) की बढ़ोतरी की है। इस बीच, चालू सीजन 2026-27 के शुरुआती नौ दिनों में बाजार में नई फसल पहुंचना शुरू हो गई है और अब तक कुल आवक लगभग 5 लाख गांठों तक पहुंच गई है। सोमवार को मंडियों में करीब 78,000 गांठों की आवक हुई, जिसमें उत्तर भारत में 17,000, मध्य प्रदेश में 16,000, गुजरात में 15,000, कर्नाटक में 9,000, आंध्र प्रदेश में 8,000, महाराष्ट्र में 7,000 और तेलंगाना में 6,000 गांठें शामिल हैं।
कम पैदावार के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने से बच रहे किसान
जानकारों के अनुसार, किसान 8,650 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी कपास बेचने की जल्दी में नहीं हैं। उनका कहना है कि पैदावार कम होने की वजह से किसानों के पास बेचने के लिए कम फसल बची है। इस वजह से गुजरात 56 किस्म की कपास की कीमत 30 सितंबर के 64,000 रुपये से 4,000 रुपये बढ़कर सोमवार को 68,000 रुपये प्रति कैंडी हो गई है। इसके पीछे मुख्य डर यह है कि इस साल की फसल पिछले साल के मुकाबले काफी कम हो सकती है। गनात्रा ने बताया कि इन कीमतों पर भी मिलों की तरफ से कपास की अच्छी मांग बनी हुई है।
मिलों में कम स्टॉक और बढ़ती मांग से बाजार में मजबूती के साफ संकेत
कॉटयार्न ट्रेड लिंक के आनंद पोपट ने अपने साप्ताहिक पत्र में बताया कि सीमित उपलब्धता और मिलों की अधिक मांग के कारण भारतीय कपास की कीमतों में मजबूती आई है। नई फसल की आवक बढ़ने के बावजूद, अक्टूबर में आपूर्ति घरेलू खपत की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी रह सकती है। कई कताई मिलों में स्टॉक की कमी और आयात की जरूरतों के कारण कपास की मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है। बाजार में आवक और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण भले ही थोड़े समय के लिए उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मांग और आपूर्ति को देखते हुए कपास बाजार की स्थिति मजबूत नजर आ रही है।
वहीं, रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब का कहना है कि आवक कम होने से स्थानीय कपास की अच्छी मांग देखी जा रही है। उनके अनुसार, पिछले 10 दिनों में दाम 3,000 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़े हैं। रायचूर में सोमवार को कीमतें 9,500 रुपये से बढ़कर 9,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं, जबकि तेलंगाना में भी दाम 9,200 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गए हैं। बूब के मुताबिक, कम पैदावार और छोटी फसल के कारण किसान अपनी उपज रोक रहे हैं। पैदावार खराब होने के चलते वे अपनी फसल सीधे बाजार नहीं ला रहे हैं, बल्कि भविष्य में बेहतर दाम की उम्मीद में इसे बेचने की जल्दबाजी से बच रहे हैं।