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IIHR के 60 साल : फल-सब्जियों की 350 से ज्यादा किस्में विकसित, अब किसानों तक पहुंचाएंगे नई तकनीक- निदेशक

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 12:53 PM IST
सार

आईसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु ने 60 साल पूरे कर लिए हैं। संस्थान अब तक फल-सब्जियों की 350 से अधिक किस्में और 163 से ज्यादा तकनीकें विकसित कर चुका है। निदेशक तुषार कांति बेहरा के मुताबिक, अब सबसे बड़ी चुनौती इन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना है।

बागवानी : भारतीय कृषि की नई ग्रोथ इंजन
बागवानी : भारतीय कृषि की नई ग्रोथ इंजन - फोटो : AI Image
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देश के प्रमुख बागवानी अनुसंधान संस्थानों में शामिल आईसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु ने अपनी स्थापना के 60 साल पूरे कर लिए हैं। इन छह दशकों में संस्थान ने देश में बागवानी क्षेत्र को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है। IIHR ने अब तक फल और सब्जियों की 350 से अधिक किस्में विकसित की हैं। इसके अलावा संस्थान ने किसानों और बागवानी क्षेत्र के लिए 163 से अधिक तकनीकें भी विकसित की हैं।

नई तकनीक को खेत तक पहुंचाना बड़ी चुनौती
संस्थान के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर IIHR के निदेशक तुषार कांति बेहरा ने बागवानी क्षेत्र में संस्थान के काम और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तार से बताया। बेहरा ने बिजनेस लाइन को बताया कि नई तकनीक और नवाचार विकसित करना जरूरी है, लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती इन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि किसी तकनीक का असली फायदा तभी है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर खेत तक पहुंचे और किसान उसका इस्तेमाल कर सकें।

छह दशकों में बागवानी को मिली नई दिशा
IIHR ने पिछले 60 वर्षों में फल, सब्जियों और दूसरी बागवानी फसलों के क्षेत्र में शोध किया है। संस्थान की ओर से विकसित किस्मों और तकनीकों का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और किसानों के सामने आने वाली खेती की चुनौतियों का समाधान करना रहा है। संस्थान अब बदलते मौसम, नई उत्पादन तकनीकों, बेहतर गुणवत्ता वाली किस्मों और किसानों तक तकनीक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दे रहा है।

बेहरा ने कहा कि आने वाले समय में केवल नई तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं होगा। वैज्ञानिक संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक की जानकारी, प्रशिक्षण और उसका इस्तेमाल किसानों तक आसानी से पहुंचे।

किसानों तक पहुंच पर रहेगा जोर
IIHR की भविष्य की योजनाओं में शोध के साथ-साथ तकनीक के लास्ट माइल डिलीवरी पर जोर रहेगा। यानी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किस्मों और तकनीकों को किसान तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करना अहम होगा। संस्थान का मानना है कि बागवानी में नई किस्मों और तकनीकों के साथ किसानों को सही जानकारी और प्रशिक्षण मिलने से उत्पादन और आमदनी दोनों में सुधार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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