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Himalayan Roundtable Immediate Action Needed Save Himalayas Experts Expressed Concern At Meeting
Himalayan Roundtable: हिमालय पर बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञ चिंतित, जल्द आएगी व्हाइट पेपर रिपोर्ट
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 13 Mar 2026 02:45 PM IST
सार
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय दबाव और सतत विकास की चुनौतियों पर चर्चा के लिए नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में “हिमालयन राउंडटेबल” का आयोजन किया गया। इस बैठक में नीति-निर्माताओं, जलवायु वैज्ञानिकों, वास्तुकारों, पर्यावरण विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।
हिमालय पर बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञ चिंतित
- फोटो : सोशल मीडिया
हिमालय केवल पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन का आधार है। लेकिन तेजी से बढ़ता शहरीकरण, अनियंत्रित पर्यटन और जलवायु परिवर्तन इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। इन्हीं चुनौतियों पर चर्चा करने और समाधान तलाशने के लिए नई दिल्ली में विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने “हिमालयन राउंडटेबल” में मंथन किया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हिमालय के संरक्षण और सतत विकास के लिए तुरंत ठोस नीतिगत कदम उठाने होंगे, जिनकी रूपरेखा जल्द जारी होने वाली व्हाइट पेपर रिपोर्ट में सामने आएगी।
बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते पर्यटन, बुनियादी ढांचे के निर्माण, शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों को पर्यावरणीय संतुलन और जलवायु लचीलापन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) के साथ संतुलित करना बेहद जरूरी है। यह राउंडटेबल सीपी कुकरेजा फाउंडेशन फॉर डिजाइन एक्सीलेंस की ओर से आयोजित किया गया था, जिसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने किया।
'स्थानीय समुदायों की आजीविका को सुरक्षित रखना जरूरी'
अरुणाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी. सुब्रमण्यम ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश के सबसे समृद्ध वन पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सुरक्षित रखना जरूरी है। उनके अनुसार ऐसे संवाद मंच सरकार, उद्योग और समाज को एक साथ लाकर स्थायी समाधान तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हिमालय एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हरपाल सिंह ने हिमालयी विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है, जिस पर पूरे उपमहाद्वीप के करोड़ों लोगों का जीवन निर्भर करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनियंत्रित विकास और अल्पकालिक आर्थिक सोच से पर्यावरणीय संतुलन और आपदा-प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर नुकसान हो सकता है।
विकास योजनाओं का रखना होगा ध्यान
दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन के चेयरमैन अजीत पई ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में विकास योजनाओं को स्थानीय भू-आकृति, जलवायु और पारिस्थितिकी को ध्यान में रखकर तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि सतत डिजाइन, कम प्रभाव वाले बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विकास को भविष्य की परियोजनाओं का आधार बनाना चाहिए।
गंभीर हैं प्राकृतिक आपदाएं
टेरी के वरिष्ठ निदेशक डॉ. दीपांकर सहारिया ने कहा कि हिमालय में अनियमित वर्षा, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों के बढ़ते दबाव का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के सुरक्षित भविष्य के लिए नीति, विज्ञान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को साथ लेकर चलना जरूरी है।
सीपी कुकरेजा आर्कीटेक्ट्स के मैनेजिंग प्रिंसिपल दिक्षु सी. कुकरेजा ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों के लिए विकास का अलग मॉडल तैयार करना होगा। उनके अनुसार यहां के बुनियादी ढांचे और वास्तुकला को स्थानीय पर्यावरण और भू-आकृति की गहरी समझ के साथ डिजाइन करना आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने अनियंत्रित पर्यटन, वनों की कटाई, अनियमित मौसम और पहाड़ी शहरों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन कारणों से उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, बाढ़ और पर्यावरणीय क्षरण की घटनाएं बढ़ रही हैं। छुट्टियों और लंबे वीकेंड के दौरान पर्यटकों की बढ़ती संख्या से वाहनों का प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और पहाड़ी बुनियादी ढांचे पर दबाव भी बड़ी समस्या बन गया है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि हिमालय केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं बल्कि देश की प्रमुख नदियों, जैव विविधता और करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा का आधार है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए मजबूत पर्यावरणीय नीतियां, जिम्मेदार पर्यटन नीति, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है।
विस्तृत व्हाइट पेपर रिपोर्ट होगी तैयार
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस चर्चा के आधार पर एक विस्तृत व्हाइट पेपर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट में हिमालयी क्षेत्र के संरक्षण और सतत विकास के लिए नीतिगत सुझाव और कार्ययोजनाएं शामिल होंगी। यह दस्तावेज जल्द ही जारी किया जाएगा और उम्मीद है कि यह हिमालय से जुड़े नीतिगत फैसलों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी. सुब्रमण्यम, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हरपाल सिंह, दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन के चेयरमैन अजीत पई, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर के महानिदेशक अमित प्रोथी, टेरी के वरिष्ठ निदेशक डॉ. दीपांकर सहारिया, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. ए. के. गोसाईं और डॉ. विभा अरोड़ा, आईआईटी रोपड़ के प्रोफेसर डॉ. रीत कमल तिवारी, इंस्टीट्यूशन ऑफ सिविल इंजीनियर्स के चेयरमैन डॉ. एस. एल. स्वामी, समास हीलिंग एंड वेलनेस की संस्थापक शोभना राणा, सीपी कुकरेजा आर्कीटेक्ट्स के मैनेजिंग प्रिंसिपल दिक्षु सी. कुकरेजा और काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के अध्यक्ष अभय पुरोहित समेत कई विशेषज्ञ शामिल हुए।
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