उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राहत राशि बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल से 4 नवंबर तक हुए नुकसान पर लागू होंगी।
प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने पर परिवार को मिलने वाली सहायता चार लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दी गई है।
फसल और जमीन के नुकसान के लिए सिंचित क्षेत्र में मुआवजा 17 हजार से बढ़ाकर 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और असिंचित क्षेत्र में 8,500 से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर किया गया है। बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी के नुकसान पर सहायता 22,500 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।
खेतों से गाद हटाने के लिए अब 23 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे, जो पहले 18 हजार रुपये थे। भूस्खलन और हिमस्खलन से जमीन को नुकसान होने पर सहायता 47 हजार से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है।
पशुपालकों के लिए भी राहत बढ़ाई गई है। बड़े पशुओं की मौत पर 40 हजार के बजाय 50 हजार रुपये, बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं पर चार हजार के बजाय 5,500 रुपये और घोड़े-खच्चर जैसे भारवाही पशुओं पर 20 हजार के बजाय 25,400 रुपये मिलेंगे। मुर्गीपालकों को प्रति पक्षी 100 के बजाय 130 रुपये दिए जाएंगे।
रेशम उत्पादन में एरी, मल्बरी और टसर के लिए सहायता छह हजार से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा मूगा रेशम के लिए 7,500 से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।
मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर मैदानी क्षेत्रों में 1.85 लाख और पहाड़ी क्षेत्रों में 2.06 लाख रुपये दिए जाएंगे। मैदानी क्षेत्रों में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 93 हजार रुपये मिलेंगे।
सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत के लिए 15.50 लाख रुपये और माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए 26 लाख रुपये तक की सहायता निर्धारित की है। सड़कों और अस्पतालों की मरम्मत के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं।
आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में अधिकतम 30 दिन तक सहायता मिलेगी। सूखे की स्थिति में पेयजल सहायता 90 दिनों तक उपलब्ध कराई जाएगी। ये नई दरें SDRF और NDRF के संशोधित मानकों के तहत लागू की गई हैं।