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यूपी में खूब बरसा पानी : फिर भी 20 जिले प्यासे... संभल में 97% ज्यादा तो शामली में 68% कम बारिश

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 05 Oct 2026 02:18 PM IST
सार

  • यूपी में इस मानसून सामान्य से 8% ज्यादा बारिश हुई।
  • जून में 54% और जुलाई में 17% कम बारिश हुई।
  • सितंबर में सामान्य से 63% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
  • 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश रही।

यूपी में खूब बरसा पानी : फिर भी 20 जिले प्यासे
यूपी में खूब बरसा पानी : फिर भी 20 जिले प्यासे - फोटो : AI Image
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विस्तार
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मानसून खत्म होने को है और उत्तर प्रदेश में इस बार बारिश का कुल आंकड़ा राहत देने वाला है। जून से सितंबर के बीच प्रदेश में सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। लेकिन जब जिलेवार और महीने के आंकड़े देखते हैं तो तस्वीर बदल जाती है। कहीं सामान्य से करीब दोगुनी बारिश हुई, तो कहीं 60 फीसदी से ज्यादा कमी रही।

मानसून की शुरुआत में बारिश ने निराश किया, लेकिन सितंबर में अचानक तेज बारिश ने पूरी तस्वीर बदल दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 16 फीसदी ज्यादा, जबकि पूर्वी यूपी में सिर्फ 2 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। यानी इस साल यूपी में कहानी सिर्फ ज्यादा या कम बारिश की नहीं, बल्कि बारिश के असमान वितरण और बदलते पैटर्न की भी है।

जून-जुलाई में कमी, सितंबर में बरसा खूब पानी
भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के आंकड़ों के अनुसार, जून से सितंबर के बीच यूपी में कुल 802.9 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य बारिश 746.2 मिमी मानी जाती है। इस तरह पूरे मानसून में बारिश सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा रही। हालांकि, मानसून के शुरुआती दो महीने सूखे जैसे रहे। जून में सामान्य से 54 फीसदी कम और जुलाई में 17 फीसदी कम बारिश हुई।

इसके बाद अगस्त में स्थिति सुधरी और बारिश सामान्य से 24 फीसदी ज्यादा रही। सितंबर में तो बारिश ने सारे आंकड़े बदल दिए। इस महीने सामान्य 153.1 मिमी के मुकाबले 250.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 63 फीसदी ज्यादा है। सितंबर में पूर्वी यूपी में सामान्य से 58 फीसदी और पश्चिमी यूपी में 74 फीसदी ज्यादा बारिश हुई।

सितंबर की बारिश ने पूरी तस्वीर बदल दी
मानसून 2026 को सिर्फ पूरे सीजन के 8 फीसदी अधिक बारिश के आंकड़े से नहीं समझा जा सकता। जून और जुलाई में बारिश कम रही, जबकि अगस्त और सितंबर में स्थिति पूरी तरह बदल गई। चार महीनों के आंकड़े देखें तो जून में -54 फीसदी, जुलाई में -17 फीसदी, अगस्त में +24 फीसदी और सितंबर में +63 फीसदी बारिश हुई। यानी मानसून की बारिश पूरे सीजन में समान रूप से नहीं हुई। आखिरी महीने में हुई भारी बारिश ने शुरुआती दो महीनों की कमी को राज्य के औसत में काफी हद तक पूरा कर दिया।

20 जिलों में सामान्य से कम बारिश
राज्य में औसतन 8 फीसदी ज्यादा बारिश के बावजूद 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। इनमें 16 जिले डेफिसिएंट और चार जिले लार्ज डेफिसिएंट श्रेणी में रहे। सबसे ज्यादा कमी शामली और देवरिया में 68 फीसदी, गाजियाबाद में 63 फीसदी और कुशीनगर में 61 फीसदी रही। यानी राज्य का औसत भले ही बेहतर रहा हो, लेकिन कई जिलों में सामान्य बारिश का बड़ा हिस्सा नहीं मिल पाया।

संभल में 97% ज्यादा, शामली में 68% कम बारिश
यूपी में बारिश की असमानता को संभल और शामली के आंकड़ों से समझा जा सकता है। दोनों जिलों के बीच करीब 180 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन बारिश का अंतर बहुत बड़ा रहा। संभल में सामान्य से 97 फीसदी ज्यादा बारिश हुई, जबकि शामली में 68 फीसदी कम। यानी एक जिले में सामान्य से लगभग दोगुनी बारिश हुई, वहीं दूसरे जिले में बारिश की भारी कमी रही।

पश्चिमी यूपी में ज्यादा, पूर्वी यूपी में कम बारिश
इस साल पश्चिमी और पूर्वी यूपी के बारिश के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। पश्चिमी यूपी में सामान्य से 16 फीसदी ज्यादा, जबकि पूर्वी यूपी में सिर्फ 2 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। पूर्वी यूपी में 2022 से 2025 तक लगातार सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। 2022 में 30 फीसदी, 2023 में 29 फीसदी, 2024 में 7 फीसदी और 2025 में 17 फीसदी कम बारिश हुई।

2026 में जाकर यह आंकड़ा सामान्य से सिर्फ 2 फीसदी ज्यादा हुआ। इसके उलट पश्चिमी यूपी में 2023 से लगातार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। 2023 में 4 फीसदी, 2024 में 11 फीसदी, 2025 में 12 फीसदी और 2026 में 16 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

2026 में 10 साल की सबसे ज्यादा मानसूनी बारिश
पिछले 10 साल के आंकड़ों में 2026 का मानसून खास रहा। 2017 से 2026 के बीच यूपी में सबसे कम मानसूनी बारिश 2022 में 533.5 मिमी दर्ज हुई थी। इसके मुकाबले 2026 में यह बढ़कर 802.9 मिमी पहुंच गई। यानी चार साल में करीब 269 मिमी का अंतर आया। 2017 से 2026 के आंकड़ों में 2026 में प्रदेश में सबसे ज्यादा मानसूनी बारिश दर्ज हुई।

सवाल सिर्फ ज्यादा बारिश का नहीं, उसके बंटवारे का है
इस मानसून की सबसे अहम बात बारिश की कुल मात्रा से ज्यादा उसका असमान वितरण है। राज्य का औसत देखकर लगेगा कि मानसून अच्छा रहा, लेकिन जिलेवार आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं। 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश रही, जबकि कुछ जिलों में सामान्य से करीब दोगुनी बारिश हुई। पश्चिमी यूपी में लगातार बारिश बढ़ रही है, वहीं पूर्वी यूपी लंबे समय तक कमी का सामना कर रहा है।

इससे संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में बारिश का पारंपरिक पैटर्न बदल रहा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में सिर्फ यह देखना काफी नहीं होगा कि कुल कितनी बारिश हुई, बल्कि यह भी देखना होगा कि कहां, कब और कितनी बारिश हुई।
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