हरियाणा में मूंग किसान कम भाव पर आढ़तियों को उपज बेचने के लिए मजबूर है। केंद्र सरकार ने इस साल 8,780 रुपये प्रति क्विंटल पर मूंग की एमएसपी तय की है। लेकिन प्रदेश में खरीद शुरू होने में देरी के चलते किसानों को कम भाव पर मूंग बेचनी पड़ रही है। गौर करने वाली बात यह है कि एक अक्तूबर से मूंग खरीद शुरू करने की योजना थी, लेकिन खरीद एजेंसी हैफेड इस योजना को लागू नहीं कर पाई।
मंडियों में फसल की आवक और व्यापारियों की मनमानी
रिपोर्ट के अनुसार, हिसार और आदमपुर की मंडियों में मूंग की आवक शुरू हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, इन दोनों मंडियों में लगभग 1,500-1,500 क्विंटल मूंग पहुंच चुकी है। आढ़तिये किसानों को एमएसपी से करीब 1,000 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल कम का भाव दे रहे हैं।
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है की हिसार में किसान निजी व्यापारियों को पांच हजार क्विंटल से ज्यादा मूंग बेच भी चुके हैं।
नेफेड के निर्देशों और मानको का इंतजार
अब सवाल उठता है कि सरकारी खरीद में देरी की क्या वजह है? अधिकारियों की माने तो अब नेफेड की ओर से खरीद से जुड़े दिशा-निर्देशों और मानकों के जारी होने का इंतजार है। हिसार के एक किसान ने इस बार 7,100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर एक निजी व्यापारी को उपज बेच दी। एक दूसरे किसान का कहना है की मांग उत्पादन की लागत ही 7,300 रुपये प्रति क्विंटल आई है। उनका कहना है कि फसल से अच्छे भाव की उम्मीद थी, लेकिन सरकार खरीद मे देरी से उन्हें करीब 1,500 रुपये का घाटा सहना पड़ रहा है।
किसानों की प्रशासन से मांग
लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए किसानों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि वे बिना किसी देरी के मूंग की सरकारी खरीद तुरंत शुरू करें। किसानों का कहना है कि अगर खरीद में ऐसे ही देरी होती रही, तो उनका आर्थिक नुकसान और ज्यादा बढ़ जाएगा।