हरियाणा के गन्ना किसान उचित और लाभकारी मूल्य को लेकर पूरे राज्य में एक बड़ा आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने के दामों में की गई बढ़ोतरी को किसानों ने नाकाफी और अपना अपमान बताया है।
सरकार का 430 रुपये का प्रस्ताव नामंजूर, किसानों की मांग 600 रुपये
सरकार ने अगले दो सालों के लिए गन्ने की कीमतों में कुल 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार द्वारा तय की गई इन नई दरों के तहत, पेराई सत्र 2026-27 में किसानों को गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा, जिसे 2027-28 में बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया जाएगा। हालांकि, किसानों ने सरकार के इस फैसले को ठुकरा दिया है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे आगामी सीजन के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव की मांग कर रहे हैं।
खेती की लागत बढ़ी, लेकिन 15 पैसे प्रति किलो की मामूली बढ़ोतरी
किसान नेताओं का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने जानकारी दी कि राज्य भर की 12 चीनी मिलों के किसान गन्ना समितियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक अहम बैठक में प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने का फैसला लिया गया है। चढूनी के मुताबिक, सरकार ने गन्ने के दाम में मात्र 15 पैसे प्रति किलो का इजाफा किया है, जो बहुत कम है। उन्होंने कहा कि एक तरफ बाजार में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार किसानों को उनकी फसल का सही और उचित दाम नहीं दे रही है।
नवंबर में पंचायतों से लेकर जनवरी में मिलों पर तालाबंदी तक की रणनीति
इस नाराजगी के बीच किसानों ने अपने आंदोलन की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। गन्ना किसान समितियों के प्रतिनिधियों ने तय किया है कि नवंबर के अंत तक राज्य की हर चीनी मिल पर 'किसान पंचायत' आयोजित की जाएगी और अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद, अपनी ताकत दिखाने और आंदोलन को तेज करने के लिए 15 दिसंबर के आसपास एक बड़ी 'महापंचायत' बुलाई जाएगी।
किसानों के तय कार्यक्रम के अनुसार, 25 दिसंबर से सभी चीनी मिलों के बाहर धरने शुरू कर दिए जाएंगे। अगर सरकार फिर भी उनकी मांगें नहीं मानती है, तो किसानों ने चेतावनी दी है कि वे 2 जनवरी से गन्ने की कटाई पूरी तरह बंद कर देंगे और 5 जनवरी को मिलों पर ताला जड़ देंगे। किसानों ने यह भी तय किया है कि जब तक सरकार कीमतें नहीं बढ़ाती, तब तक मिलों को कोई गन्ना नहीं भेजा जाएगा।
मुनाफा न होने के कारण गन्ने की खेती छोड़ रहे हैं किसान
किसानों का कहना है कि पिछले छह सालों से हरियाणा सरकार ने गन्ने का कोई भी ऐसा मूल्य घोषित नहीं किया है, जिससे किसानों को लाभ हो सके। सही दाम न मिलने के कारण राज्य में गन्ने की फसल के रकबे (खेती के क्षेत्र) में भी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार हो रहे नुकसान और लाभकारी मूल्य के अभाव में किसान अब गन्ने की खेती छोड़कर अन्य नकदी फसलों (कैश क्रॉप्स) की तरफ रुख करने लगे हैं, जिससे चीनी मिलों के सामने भी संकट की स्थिति पैदा हो रही है।