बीते मानसून सीजन में कम बारिश के चलते रबी फसलों की बुवाई काफी सुस्त चल रही है। 30 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, रबी फसलों की बुवाई लगभग 38 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के इसी समय की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत कम है। इस रुझान को देखते हुए सरकार ने 225 जिलों के लिए आपातकालीन योजनाएं तैयार की हैं, जो इस मौसम के लिए एक असामान्य कदम माना जा रहा है। हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि अगले डेढ़ महीने में बुवाई में तेजी आएगी।
नया डैशबोर्ड करेगा किसानों और अधिकारियों की मदद
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एम. एल. जाट का कहना है कि आकस्मिक योजना को एक नए स्तर पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा, हम पिछले सीजन से ही इस पर काम कर रहे हैं और एक डायनेमिक डैशबोर्ड विकसित करना चाहते हैं।
अधिकारी के अनुसार, यह प्रस्तावित डैशबोर्ड जिले स्तर पर जानकारी देगा। इसमें भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान, जल निकायों के डेटा और अन्य जरूरी जानकारियों को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर सही फैसले ले सकें।
डैशबोर्ड पूरे देश क कवर करेगा
एम. एल. जाट ने साफ किया कि यह डैशबोर्ड केवल उन 225 जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश को कवर करेगा। यह सिर्फ आपात स्थितियों के लिए नहीं होगा, बल्कि सामान्य खेती के लिए भी सलाह देगा, जिससे किसानों और अधिकारियों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग परिस्थितियों में उन्हें क्या कदम उठाने चाहिए।
एग्रीस्टैक से जुड़ेगा डैशबोर्ड
ICAR के महानिदेशक ने बताया कि भविष्य में इस डैशबोर्ड को एग्रीस्टैक पहल के साथ जोड़ा जाएगा ताकि कृषि से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को एक जगह लाया जा सके। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही उपयोगी साधन होगा। हमें इसे एग्रीस्टैक से जोड़ना होगा, क्योंकि इन सभी चीजों को एक साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है।
इस डैशबोर्ड की खासियत यह होगी कि स्थिति बदलने पर इसके डेटा में भी बदलाव होगा। अधिकारी ने बताया कि यदि शुरुआत में किसी जिले को सूखा प्रभावित माना गया है और आने वाले दिनों में वहां पर्याप्त बारिश हो जाती है, तो उसे उस श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा। इसका नया आकलन मौसम विभाग के अगले 15 दिनों के पूर्वानुमान और बारिश के ताजा आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
खाली खेतों में तिलहन और दलहन की खेती पर जोर
एम. एल. जाट ने जानकारी दी कि धान की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में तिलहन और दलहन की खेती बढ़ाने के अवसरों की जांच के लिए ICAR ने एक टास्क फोर्स का भी गठन किया है। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में फसल में बदलाव (विविधीकरण) की काफी गुंजाइश है।
किसानों को सलाह देते हुए जाट ने कहा, जिन जगहों पर मिट्टी में गेहूं की खेती के लिए पर्याप्त नमी नहीं बची है, वहां किसान गेहूं के बजाय उपयुक्त तिलहन और दलहन की फसलें उगाने पर विचार कर सकते हैं। इसके अलावा, अधिकारी ने यह भी बताया कि अगले दो से चार महीनों के भीतर मिट्टी की सेहत को लेकर एक अलग मृदा स्वास्थ्य नीति (Soil Health Policy) पेश किए जाने की भी उम्मीद है।