पंजाब में रबी फसल की बुवाई का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन राज्य भर से डीएपी खाद की भारी कमी की खबरें सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि खाद की इस किल्लत का फायदा उठाकर प्राइवेट दुकानदार उनसे ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं।
दूसरी तरफ किसान दुकानदारों पर टैगिंग के आरोप भी लगा रहे हैं। इस समस्या को लेकर हाल ही में भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) और अन्य किसानों ने लुधियाना में खाद की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया है।
तय कीमत से 300 रुपये तक ज्यादा वसूली
किसानों का कहना है कि खाद आसानी से नहीं मिल रही है, जिससे गेहूं की बुवाई की तैयारियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि कई विक्रेता सरकार द्वारा तय की गई 1,350 रुपये प्रति 50 किलो बोरी की कीमत से ज्यादा पैसे मांग रहे हैं और साथ में बिना जरूरत का सामान थोप रहे हैं।
बुवाई में देरी से फसल का उत्पादन घटने का डर
खाद मिलने में हो रही इस परेशानी के कारण किसानों को डर है कि गेहूं की बुवाई में देरी हो सकती है, जिसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ेगा। समराला के किसान संतोख सिंह ने कहा, "अगर समय पर डीएपी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो गेहूं की बुवाई में देरी होगी और फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। खेती की बढ़ती लागत के कारण किसान पहले से ही भारी आर्थिक दबाव में हैं।" किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि वे तुरंत इस मामले में दखल दें, क्योंकि बुवाई का समय बहुत सीमित होता है और इसमें देरी होने से किसानों की योजनाएं बिगड़ सकती हैं और लागत बढ़ सकती है।
कृषि विभाग और अधिकारियों का क्या कहना है?
अधिकारियों के अनुसार, खाद की किल्लत की इन खबरों पर लुधियाना के मुख्य कृषि अधिकारी गुरदीप सिंह ने अपना पक्ष रखा है। सरकारी अधिकारी के मुताबिक, कुछ किसानों को सहकारी समितियों (कोऑपरेटिव सोसाइटी) में अपने पुराने बकाया कर्ज की वजह से डीएपी खरीदने में कठिनाई आ रही होगी।
उन्होंने यह बात मानी कि कुछ जिलों में डीएपी की अस्थायी कमी हो सकती है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि बाजार में डीएपी बिल्कुल खत्म नहीं हुई है। कृषि अधिकारी गुरदीप सिंह के अनुसार, बाजार में डीएपी के कई अन्य विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन बहुत से किसान उनका उपयोग करने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे इन विकल्पों के फायदों को समझें और जहां भी सही लगे, उनका इस्तेमाल करें।