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Home› Khabar Junction› Harvest Was Expected Next Month But Drought Ruined Everything Farmer Runs Tractor Over Banana Plants Suffer

अगले महीने होनी थी कमाई, सूखे ने बिगाड़ा खेल : किसान ने ट्रैक्टर चला कर रौंदे केले के पौधे, लाखों का नुकसान...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 01 Nov 2026 02:16 PM IST
सार

  • महाराष्ट्र के वाशिम जिले में सूखे और पानी की कमी से केले की फसल बर्बाद।
  • बागवान ने ट्रैक्टर से रौंदे 3,000 केले के पौधे
  • 2.5 एकड़ में केले की खेती पर खर्च किए थे 3.5 से 4 लाख रुपये, लागत भी नहीं निकली
  • सिंचाई के लिए पानी की कमी और तापमान ने बिगाड़ा पूरा गणित
  • महाराष्ट्र की 80 प्रतिशत से अधिक तहसीलों में सरकार ने सूखा घोषित किया।

सूखे ने बिगाड़ा केले की बागवानी का गणित।
सूखे ने बिगाड़ा केले की बागवानी का गणित। - फोटो : AI
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विस्तार
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महाराष्ट्र में सूखे की मार किसानों पर आर्थिक दबाव डाल रही है। कम बारिश के कारण वाशिम जिले के युवा बागवान को केले के 3 हजार पौधों को नष्ट करना पड़ा है। इस बर्बादी के चलते किसान को लगभग 4 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

अगले महीने तुड़ाई की उम्मीद थी, बारिश की कमी ने बिगाड़ा खेल
उमेश मरकड़ ने इस साल 2.5 एकड़ में केले के तीन हजार पौधों की रोपाई की थी। उन्हें अगले महीने से तुड़ाई शुरू होने की उम्मीद थी। लेकिन कम बारिश के चलते बाग में सिंचाई के मोर्चे पर चुनौती खड़ी कर दी, वहीं, तापमान ने स्थिति को और खराब कर दिया। इस तरह 
उमेश को केले के हरे भरे पौधों को मुरझाते हुए देखना पड़ा।

उमेश ने जल संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मानसूनी बारिश बेहद कम होने के कारण अक्तूबर महीने में ही उनके कुएं और बोरवेल पूरी तरह से सूख गए थे।
 
ट्रैक्टर चलाकर रौंदी अपनी मेहनत
पानी के कमी के लचे सल को सूखता देख, किसान उमेश मरकड़ ने शुक्रवार को अपने पूरे खेत में ट्रैक्टर चला दिया और सभी 3,000 केले के पौधों को नष्ट कर दिया। मरकड़ ने आगे कहा कि इस बागान को तैयार करने में उन्होंने 3.5 लाख से 4 लाख रुपये तक खर्च किए थे, लेकिन अब उन्हें इससे शून्य रिटर्न मिला है, यानी उनकी कोई कमाई नहीं हुई।

80 प्रतिशत तहसीलों में सूखा घोषित
यह मात्र एक कहानी है, प्रदेश की 80 प्रतिशत तहसीलें कम बारिश के चलते सूखे की जद में है। एक तरफ जल संकट ने किसानों की चुनौती बढ़ा दी है, वही, पशु चारे की उपलब्धता को लेकर भी किसान परेशान है। 
 


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