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पंजाब में पराली जलाने पर CAQM सख्त: तीन जिलों में खेतों तक पहुंची टीम, किसानों से की बातचीत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 01 Nov 2026 12:55 PM IST
सार

पंजाब में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए CAQM की टीम ने संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला का दौरा किया। जानिए कैसे पराली से बायोमास पेलेट और औद्योगिक ईंधन बनाया जा रहा है।

पराली जलाने पर रोक के लिए CAQM की टीम ने पंजाब के तीन जिलों का किया दौरा
पराली जलाने पर रोक के लिए CAQM की टीम ने पंजाब के तीन जिलों का किया दौरा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और धान के अवशेषों के सही प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उच्चस्तरीय टीम ने संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला जिलों का दौरा किया। 31 अक्टूबर को टीम ने जिला प्रशासन, पुलिस, कृषि विभाग और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान पराली प्रबंधन के लिए किए जा रहे इंतजामों और खेतों में उपलब्ध कृषि मशीनों की जानकारी ली गई।

CAQM के तकनीकी सदस्य डॉ. एसडी अत्री और वैज्ञानिक विजय कुमार की अगुवाई में टीम ने संगरूर के जिला प्रशासनिक परिसर में अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और धान के अवशेषों के प्रबंधन के लिए चलाए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।

बॉयलर में हर साल 17 हजार टन पराली का इस्तेमाल
टीम ने मलेरकोटला में धुरी रोड स्थित एक बोर्ड और कागज बनाने वाली इकाई का भी दौरा किया। यहां बॉयलर में ईंधन के रूप में धान की पराली का इस्तेमाल किया जाता है। उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस इकाई में हर साल करीब 17 हजार टन पराली का उपयोग किया जाएगा। इससे पराली के खेतों में जलाने के बजाय औद्योगिक कामों में इस्तेमाल को बढ़ावा मिल रहा है।

सुपर सीडर से पराली प्रबंधन का देखा काम
टीम ने मलेरकोटला जिले के अहमदाबाद गांव में खेतों में चल रही कृषि मशीनों का जायजा लिया। कृषि विभाग ने सुपर सीडर मशीन के काम करने का तरीका भी दिखाया। इस दौरान अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की। किसानों ने भरोसा दिलाया कि वे पराली नहीं जलाएंगे और कृषि मशीनों की मदद से खेतों में ही उसका प्रबंधन करेंगे।

इसके बाद टीम ने संगरूर जिले की भवानीगढ़ तहसील के बस्सियार्क, कपियाल और झनेरी गांवों का दौरा किया। पराली जलाने के लिहाज से संवेदनशील गांव घराचों में भी खेतों में पराली के प्रबंधन के तरीके दिखाए गए। अधिकारियों ने किसानों से मशीनों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल में आ रही दिक्कतों के बारे में जानकारी ली।

पराली से बनाए जा रहे बायोमास पेलेट
CAQM की टीम ने भवानीगढ़ के नडामपुर गांव में पराली से बायोमास पेलेट बनाने वाली इकाई का भी दौरा किया। इन पेलेट का इस्तेमाल ताप बिजली घरों में ईंधन के रूप में किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसी इकाइयां पराली के खेतों से बाहर इस्तेमाल (एक्स-सीटू प्रबंधन) को बढ़ावा दे रही हैं। इससे किसानों को पराली के निपटारे का एक और विकल्प मिल रहा है और उसे जलाने की जरूरत कम हो सकती है।

लक्ष्य के मुताबिक जमीन पर दिखें काम
दौरे के अंत में CAQM अधिकारियों ने संबंधित विभागों को पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी और मिलकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन और विभागों ने पराली प्रबंधन के लिए जो लक्ष्य तय किए हैं, उन्हें जमीन पर भी पूरा किया जाना चाहिए। केवल योजनाएं बनाने के बजाय खेतों में उनके असरदार तरीके से लागू होने पर ध्यान देना जरूरी है।
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