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IMD Weather Forecast: गेहूं की बुवाई के बीच किसानों को राहत, नवंबर में इन राज्यों में अच्छी बारिश के आसार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 01 Nov 2026 09:09 AM IST
सार

  • नवंबर में मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश के आसार।

  • मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में अच्छी बारिश होने का अनुमान।

  • पश्चिमी यूपी, पंजाब और हरियाणा में सामान्य से कम बारिश की संभावना।

  • राजस्थान और गुजरात के कई इलाकों में कम बारिश से रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका।

गेहूं की खेती
गेहूं की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अक्टूबर में कम बारिश से परेशान किसानों के लिए नवंबर का मौसम कुछ राहत लेकर आ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने नवंबर में मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। यह गेहूं की बुवाई का अहम समय है। ऐसे में अच्छी बारिश से रबी फसलों की बुवाई को मदद मिल सकती है।

हालांकि, देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। नवंबर में देशभर में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) 29.7 मिमी के 77 फीसदी से भी कम रहने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश, पूर्वी यूपी और बिहार में अच्छी बारिश के आसार
आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक, नवंबर में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के आसपास के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी सामान्य से अच्छी बारिश होने की संभावना है।

इसके उलट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। हालांकि, इन राज्यों में गेहूं की खेती का बड़ा हिस्सा सिंचाई पर निर्भर है। इसलिए कम बारिश का असर सीमित रहने की उम्मीद है।

राजस्थान और गुजरात के बड़े हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इन इलाकों में कई जगह सिंचाई के पक्के साधन नहीं हैं। ऐसे में कम बारिश से रबी फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

अक्टूबर में कई राज्यों में बारिश की भारी कमी
अक्टूबर में देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई। पूर्वी राजस्थान में बारिश 25 फीसदी कम रही, जबकि पश्चिमी राजस्थान में 63 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 71 फीसदी और पश्चिमी हिस्से में 82 फीसदी कम बारिश हुई। गुजरात क्षेत्र में बारिश की कमी 99 फीसदी, सौराष्ट्र और कच्छ में 87 फीसदी और मध्य महाराष्ट्र में 95 फीसदी रही।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के आखिरी तीन दिनों में हुई बारिश से स्थिति में सुधार आया। 28 अक्टूबर तक यहां बारिश में 57 फीसदी की कमी थी, जो महीने के अंत तक घटकर चार फीसदी रह गई। बिहार में भी बारिश की कमी 55 फीसदी से घटकर चार फीसदी पर आ गई। पूर्व कृषि आयुक्त जेएस संधू ने भी पहले कहा था कि रबी फसलों की सामान्य बुवाई के लिए नवंबर में होने वाली बारिश काफी अहम रहेगी।

दक्षिण भारत में कम बारिश का अनुमान
आईएमडी ने दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है। इसमें तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, केरल, माहे और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं। इस पूरे क्षेत्र में नवंबर की बारिश लंबी अवधि के औसत 118.7 मिमी के 77 फीसदी से भी कम रहने का अनुमान है।

जनवरी से कमजोर पड़ सकता है अल नीनो
आईएमडी के महानिदेशक के मुताबिक, प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो का असर दिसंबर तक बना रह सकता है। हालांकि, जनवरी से मार्च के बीच इसकी तीव्रता धीरे-धीरे कम होने की संभावना है।देश में बारिश की कुल कमी भी अक्टूबर के आखिरी दिनों में कुछ कम हुई है। 28 अक्टूबर तक देश में सामान्य से 48 फीसदी कम बारिश हुई थी, लेकिन 31 अक्टूबर तक यह कमी घटकर 31 फीसदी रह गई।

इसके बावजूद अक्टूबर 2001 के बाद से छठा सबसे कम बारिश वाला अक्टूबर रहा। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात से जुड़ी बारिश और पश्चिमी विक्षोभ के कारण दक्षिण, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में बारिश हुई, जिससे कुल कमी में सुधार आया।

अक्टूबर में 1901 के बाद सबसे अधिक रहा अधिकतम तापमान
अक्टूबर में देश का औसत अधिकतम तापमान 32.43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1901 के बाद अक्टूबर का सबसे अधिक अधिकतम तापमान है। वहीं, औसत तापमान 26.63 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद तीसरा सबसे अधिक है।

नवंबर में भी देश के ज्यादातर हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। हालांकि, हिमालय की तलहटी के कुछ इलाकों में दिन का तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है। रात का तापमान भी ज्यादातर क्षेत्रों में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में रात का तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है।

2026-27 में 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने फसल वर्ष 2026-27 में 17.772 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 12.1 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य शामिल है। इसके अलावा चना उत्पादन का लक्ष्य 1.233 करोड़ टन, मसूर का 21 लाख टन, सरसों का 1.43 करोड़ टन और जौ का 24.2 लाख टन रखा गया है।
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