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Home› Khabar Junction› Government Keeps A Close Watch On Sugar Prices And Supply Mills Must Submit Full Details Of Their Production

चीनी की कीमतों-सप्लाई पर सरकार का पहरा : मिलों को हर महीने की 15 तारीख तक देना होगा उत्पादन का पूरा ब्योरा...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 27 Oct 2026 09:54 AM IST
सार

  • चीनी की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने मिलों से हर महीने उत्पादन का अनुमान देने को कहा।
  • चीनी की औसत खुदरा कीमत 58.62 रुपये प्रति किलो पहुंची, पिछले साल के मुकाबले 27 प्रतिशत ज्यादा।
  • चालू सीजन में अब तक 4 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, पिछले साल इसी समय 60 हजार टन था।
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से इस साल चीनी उत्पादन घटने की आशंका जताई गई है।
  • चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 1 नवंबर 2026 से गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर रोक लगाई गई है।

नए गन्ना पेराई सीजन में चीनी उत्पादन पर अधिक बारीकी से नजर रखेगी सरकार।
नए गन्ना पेराई सीजन में चीनी उत्पादन पर अधिक बारीकी से नजर रखेगी सरकार। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बाजार में चीनी की सप्लाई को लेकर चिंताओं के बीच खाद्य मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि सरकार ने चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि सितंबर तक चलने वाले चालू गन्ना पेराई सीजन के लिए हर महीने अपना उत्पादन अनुमान बताएं। मिलों को हर महीने की 15 तारीख तक यह जानकारी देनी होगी कि बचे हुए समय में कितना गन्ना पेरा जाएगा और कुल कितनी चीनी बनने की उम्मीद है।

मिलों संग राज्यों और कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से मासिक उत्पादन अनुमान लगाया जाएगा
जानकारों के अनुसार, मिलों की जानकारी के अलावा खाद्य मंत्रालय राज्यों के गन्ना आयुक्तों और कृषि मंत्रालय के आंकड़ों का भी इस्तेमाल करेगा। अधिकारी ने बताया कि सभी जानकारियों को मिलाकर हर महीने चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया जाएगा। यह निगरानी प्रक्रिया मई 2027 तक चलेगी, जब तक कि गन्ने की पेराई पूरी नहीं हो जाती।

चीनी निर्यात को मंजूरी और कम बारिश ने बिगाड़ा रसोई बजट
सरकार का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि पिछले साल चीनी निर्यात की छूट देने के बाद अगस्त में इसकी खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश कम होने से उत्पादन घटने की आशंका थी, जिससे कीमतें बढ़ीं। इसके बाद सरकार को दस साल में पहली बार बिना किसी टैक्स (ड्यूटी-फ्री) के 10 लाख टन (1 मिलियन टन) कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति देनी पड़ी थी।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, सोमवार को चीनी की औसत खुदरा कीमत 58.62 रुपये प्रति किलो रही, जो पिछले साल के मुकाबले 27 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं एक महीने के अंदर ही इसके दाम 4.5 प्रतिशत बढ़े हैं। अगस्त के महीने में तो कई जगहों पर चीनी 65 रुपये किलो के पार पहुंच गई थी।

देश में पर्याप्त चीनी, घबराने की जरूरत नहीं
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत के पास पर्याप्त से ज्यादा चीनी है और इसकी उपलब्धता को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है। इस्मा के मुताबिक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों में 2026-27 सीजन के लिए गन्ने की पेराई समय पर शुरू हो गई है। कुल 107 चीनी मिलों ने काम शुरू कर दिया है, जिनमें से 87 मिलें अकेले महाराष्ट्र में हैं।

सोमवार तक इस सीजन में 4 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इसी दिन तक यह मात्र 60 हजार टन था। इसके अलावा, 2025-26 सीजन के खत्म होने पर देश के पास 36 लाख टन चीनी का पुराना स्टॉक भी बचा हुआ है। हालांकि उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण इस साल कुल उत्पादन पिछले साल के 3.1 करोड़ टन के मुकाबले कम रह सकता है।

इथेनॉल के लिए गन्ने के रस पर रोक
देश में चीनी की मजबूत उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से तेल विपणन कंपनियों को इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस, चीनी के सिरप और 'बी-हैवी' शीरे के इस्तेमाल की मनाही कर दी गई है। हालांकि, सरकारी आदेश के अनुसार कंपनियों को एथेनॉल बनाने के लिए सिर्फ सी-हैवी शीरे के इस्तेमाल की छूट दी गई है, क्योंकि इसमें गन्ने की अन्य चीजों के मुकाबले चीनी की मात्रा काफी कम होती है। इस कदम से खाने वाली चीनी की पैदावार पर असर नहीं पड़ेगा।


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