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यूपी के तीन मॉडल बने देश की मिसाल: सौर सिंचाई से महिला किसान और मछली पालन तक को मिली राष्ट्रीय पहचान
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Mon, 26 Oct 2026 08:09 PM IST
सार
देश की 27 सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक पहलों में उत्तर प्रदेश के तीन मॉडल शामिल हुए हैं। जानिए बहराइच की सौर सिंचाई, मिर्जापुर के महिला किसान संगठन और गोरखपुर के बायोफ्लॉक मॉडल की खासियत।
सौर सिंचाई से महिला किसान और मछली पालन तक को मिली राष्ट्रीय पहचान
- फोटो : सोशल मीडिया
उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने देशभर से चुनी गई 27 बेहतरीन प्रशासनिक पहलों में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तीन मॉडल शामिल किए हैं। इनमें बहराइच में सौर ऊर्जा से सिंचाई, मिर्जापुर में महिलाओं का किसान उत्पादक संगठन और गोरखपुर में आधुनिक तकनीक से मछली पालन शामिल है।
इन मॉडलों की जमीनी हकीकत और कामकाज समझने के लिए केंद्र सरकार की टीम ने तीनों जिलों का दौरा किया। कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इनके अनुभवों से दूसरे राज्य भी सीख सकते हैं।
बहराइच में सौर ऊर्जा से 100 एकड़ खेतों की सिंचाई
बहराइच जिले के मिहिनपुरवा विकासखंड की घूमना भारू ग्राम पंचायत में सामुदायिक सौर ऊर्जा परियोजना के जरिए किसानों को सिंचाई की सुविधा दी जा रही है। यहां ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) के सहयोग से 43 किलोवाट पीक क्षमता का सोलर माइक्रोग्रिड लगाया गया है। इस परियोजना से करीब 200 परिवारों की 100 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए 10 सौर पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे किसानों को खेती के लिए सौर ऊर्जा आधारित सुविधा मिल रही है।
गांव की विद्युत समिति ई-रिक्शा, ई-स्कूटी और मोबाइल चार्जिंग जैसी सेवाएं भी चला रही है। इससे ग्रामीणों को रोजगार और कमाई के नए अवसर मिल रहे हैं। केंद्र सरकार की टीम ने 14 अक्टूबर को गांव पहुंचकर इस मॉडल का निरीक्षण किया।
मिर्जापुर में 1,221 महिलाएं चला रहीं किसान उत्पादक संगठन
मिर्जापुर जिले के छानबे विकासखंड में महिलाओं की ओर से संचालित किसान उत्पादक संगठन भी राष्ट्रीय स्तर पर चुनी गई पहलों में शामिल है। वर्ष 2022-23 में शुरू हुई छनवर एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से वर्तमान में 1,221 महिला शेयरधारक जुड़ी हैं।
इस संगठन के जरिए महिलाएं कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री, जैविक खाद बनाने, कृषि उपकरण उपलब्ध कराने और खेती के उत्पादों की बिक्री जैसे काम कर रही हैं। महिलाओं ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने मिलकर 25 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति भी पूरी की है।
संगठन के मुताबिक, वह फिलहाल करीब 10.50 लाख रुपये का व्यावसायिक मार्जिन अर्जित कर रहा है, जो उसके सालाना संचालन खर्च से अधिक है। संगठन का लक्ष्य सभी महिला सदस्यों की आय बढ़ाकर उन्हें लखपति दीदी बनाना है। केंद्र सरकार की टीम ने 19 अक्टूबर को संगठन का निरीक्षण किया। टीम ने विंध्य मार्ट का भी दौरा किया, जहां स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों की जानकारी ली।
गोरखपुर में बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन
गोरखपुर जिले के खजनी विकासखंड की छताही ग्राम पंचायत में महिलाएं आधुनिक तकनीक की मदद से मछली पालन कर रही हैं। यहां जल परी प्रेरणा महिला मत्स्य उत्पादक समूह की ओर से बायोफ्लॉक तकनीक अपनाई गई है। गांव में मछली पालन के लिए पांच बायोफ्लॉक इकाइयां स्थापित की गई हैं। इनके जरिए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नियंत्रित जल व्यवस्था में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन कर रही हैं।
बायोफ्लॉक तकनीक में अपेक्षाकृत कम जगह में मछली पालन किया जा सकता है। समूह की महिलाओं ने केंद्र सरकार की टीम को अपनी गतिविधियों की जानकारी दी और भविष्य में इकाइयों की संख्या बढ़ाने की योजना भी बताई। टीम ने 26 अक्टूबर को इस मॉडल का निरीक्षण किया।
दूसरे राज्यों में भी अपनाए जा सकते हैं ये मॉडल
तीनों जिलों के दौरे के बाद केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। खासतौर पर बहराइच के सामुदायिक सौर ऊर्जा मॉडल को दूसरे क्षेत्रों में भी लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
इन पहलों का उद्देश्य गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, महिलाओं की आमदनी में सुधार करना और स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। इन मॉडलों को आगे बढ़ाने में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला प्रशासन, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया, सहयोगी संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका रही है।
केंद्र सरकार ने देशभर से बेहतर प्रशासनिक कार्यों और नई पहलों की जानकारी मांगी थी। इसके बाद 27 पहलों का चयन किया गया और उनके सत्यापन के लिए नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के सहयोग से अधिकारियों की टीमें संबंधित राज्यों में भेजी गईं। इसी प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश के इन तीन मॉडलों का स्थलीय सत्यापन किया गया।
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