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Gene Banks: पीएम मोदी का बड़ा एलान, जीन बैंक की स्थापना होगी, जानें इससे किसे और क्या फायदा मिलेगा?

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Wed, 05 Mar 2025 06:10 PM IST
सार

जीन बैंक आनुवंशिक सामग्री का भंडार है। जैसे बीज, पराग या ऊतक के नमूने, जो विभिन्न पौधों की प्रजातियों से एकत्र किए जाते हैं ताकि उन्हें विलुप्ति से बचाया जा सके और भावी पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण किस्मों को संरक्षित किया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए एक जीन बैंक की स्थापना का एलान किया। इस पहल का उद्देश्य भावी पीढ़ियों के लिए आनुवंशिक संसाधन और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह वेबिनार सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और नागरिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे बजट में की गई परिवर्तनकारी घोषणाओं को प्रभावी परिणामों में बदलने में मदद करने के लिए चर्चाओं को प्रोत्साहित किया जा सके। नागरिकों को सशक्त बनाने, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने पर मुख्य ध्यान देने के साथ, विचार-विमर्श का उद्देश्य टिकाऊ और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करना; प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व; और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में काम करने वाले कुशल, स्वस्थ कार्यबल का निर्माण करना होगा। वेबिनार के मुख्य विषयों में लोगों, अर्थव्यवस्था और नवाचार में निवेश करना शामिल है।

 
जीन बैंक क्या है?
जीन बैंक आनुवंशिक सामग्री का भंडार है। जैसे बीज, पराग या ऊतक के नमूने, जो विभिन्न पौधों की प्रजातियों से एकत्र किए जाते हैं ताकि उन्हें विलुप्ति से बचाया जा सके और भावी पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण किस्मों को संरक्षित किया जा सके।

भारत का पहला जीन बैंक 1996 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (आईसीएआर-एनबीपीजीआर) द्वारा नई दिल्ली में स्थापित किया गया था। इस बैंक में महत्वपूर्ण फसल जर्मप्लाज्म के संग्रह और भंडारण के लिए देशभर के 12 क्षेत्रीय स्टेशन शामिल हैं। ये जर्मप्लाज्म पौधों या जानवरों के आनुवंशिक घटक होते हैं जिनका उपयोग अनुसंधान, संरक्षण और फसल प्रजनन में किया जाता है।

आईसीएआर-एनबीपीजीआर द्वारा बनाए गए डेटाबेस के अनुसार 15 जनवरी, 2025 तक बैंक में वर्तमान में 0.47 मिलियन एक्सेस (प्रजनन के लिए संग्रहीत और उपयोग की जाने वाली पौध सामग्री) संग्रहीत है। इनमें अनाज (0.17 मिलियन एक्सेस), बाजरा (60,600 से अधिक एक्सेस), फलियां (69,200 से अधिक एक्सेस), तिलहन (63,500 से अधिक एक्सेस) और सब्जियां (लगभग 30,000 एक्सेस) शामिल हैं।

 
बजट में हुआ है एलान
वित्त मंत्रालय ने भारत की कृषि जैव विविधता की सुरक्षा के लिए 2025-26 के बजट में दूसरे राष्ट्रीय जीन बैंक की स्थापना की घोषणा की है। इस सुविधा में 10 लाख (1 मिलियन) जर्मप्लाज्म लाइनें होंगी, जो आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन में शामिल सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण संरक्षण सहायता प्रदान करेंगी।

भारत को जैव विविधता से समृद्ध देश के रूप में जाना जाता है, जहां खेती की जाने वाली फसल की कई प्रजातियां और उनके जंगली रिश्तेदार हैं। 811 से अधिक खेती की जाने वाली फसल प्रजातियों और 902 फसल जंगली रिश्तेदारों के साथ, राष्ट्र पादप आनुवंशिक संसाधनों (पीजीआर) को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो कृषि लचीलापन, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक हैं। आईसीएआर-एनबीपीजीआर के नेतृत्व में मौजूदा राष्ट्रीय जीन बैंक 4.7 लाख से अधिक अभिगमों का संरक्षण करता है और शोधकर्ताओं, प्रजनकों और वैज्ञानिकों को साझेदारी और वितरण के माध्यम से पीजीआर संरक्षण के वैश्विक प्रयास में मदद करता है।

 
क्या फायदा मिलेगा? 
दूसरे जीन बैंक की स्थापना से वैश्विक जैवविविधता संरक्षण में अग्रणी देश के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी। यह नई सुविधा न केवल भारत के अमूल्य पादप आनुवंशिक संसाधनों की सुरक्षा करेगी, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता पहलों, विशेष रूप से सार्क और ब्रिक्स देशों के लिए भी सहायता प्रदान करेगी तथा उन देशों को संरक्षण सहायता प्रदान करेगी, जिनके पास अच्छी तरह से स्थापित पीजीआर नेटवर्क नहीं है।

जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे बढ़ते खतरों के कारण दुनियाभर में आनुवंशिक विविधता की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है, इसलिए सुरक्षा डुप्लिकेट जीनबैंक का निर्माण महत्वपूर्ण है। यह अतिरेक संरचना भारत के अपूरणीय जर्मप्लाज्म के लिए एक विफलता-सुरक्षा प्रदान करेगी, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह पहल कृषि जैव विविधता के संरक्षण, खाद्यान्न के भविष्य को सुरक्षित करने तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टिकाऊ कृषि प्रणालियों को समर्थन देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
 
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