विज्ञापन
Home Khabar Junction Fertilizer Industry Seeks One Nation One License And Uniform 5 Gst

Fertilizer Industry: उर्वरक उद्योग ने मांगा ‘वन नेशन-वन लाइसेंस’, स्पेशलिटी उर्वरकों पर 5% GST की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 21 Sep 2026 08:40 PM IST
सार

आईएमएमए ने उर्वरक लाइसेंस के लिए ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ डिजिटल सिस्टम, गैर-सब्सिडी वाले स्पेशलिटी उर्वरकों के आसान निर्यात और FCO उत्पादों पर 5% GST की मांग की है।

IMMA ने उर्वरक लाइसेंस के लिए ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ की डिजिटल व्यवस्था बनाने की मांग की है।
IMMA ने उर्वरक लाइसेंस के लिए ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ की डिजिटल व्यवस्था बनाने की मांग की है। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इंडियन माइक्रो-फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMMA) ने उर्वरक लाइसेंस के लिए ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ की डिजिटल व्यवस्था बनाने की मांग की है। संगठन ने गैर-सब्सिडी वाले भारत में बने स्पेशलिटी उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के आसान निर्यात तथा FCO के तहत अधिसूचित सभी उत्पादों पर एक समान 5% GST की मांग भी रखी है। ये सुझाव नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित IMMA के तीसरे उद्योग-सरकार राउंडटेबल में रखे गए। बैठक में माइक्रोन्यूट्रिएंट, स्पेशलिटी फर्टिलाइजर और प्लांट न्यूट्रिशन उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए।

एक बार दस्तावेज जमा करने का प्रस्ताव
IMMA अध्यक्ष डॉ. राहुल मिर्चंदानी ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से राष्ट्रीय डिजिटल फर्टिलाइजर लाइसेंसिंग डेटा स्टैक बनाने पर विचार करने का आग्रह किया। प्रस्ताव के अनुसार कंपनियां अपने कॉरपोरेट, विनिर्माण, उत्पाद, तकनीकी और अन्य जरूरी दस्तावेज एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक बार अपलोड करें।

डिजिटल सत्यापन के बाद इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में लाइसेंस और मार्केटिंग अनुमति के लिए किया जा सकेगा। IMMA ने इसे ‘सबमिट वन, वेरिफाई वन, यूज मेनी टाइम्स’ के सिद्धांत पर बनाने का सुझाव दिया। कृषि मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी (INM-Fertilizers) सुबोध कुमार ने कहा कि कॉमन डिजिटल डेटा स्टैक और ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।

FCO में छोटे उल्लंघनों पर बदलाव की मांग
IMMA ने फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (FCO) के तहत छोटे और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की मांग की। संगठन ने तकनीकी या अनजाने में हुई गड़बड़ी और जानबूझकर की गई ऐसी गलती, जिससे उर्वरक की गुणवत्ता या किसानों के हित प्रभावित हों, के बीच अंतर करने का सुझाव दिया। उद्योग ने विनिर्माण और बिक्री लाइसेंस की वैधता अवधि एक जैसी करने तथा निरीक्षण से जुड़े ‘रीजन टू बिलीव’ प्रावधानों की समीक्षा की भी मांग की।

गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों के निर्यात में आसानी की मांग
IMMA ने कहा कि जो भारत में बने उर्वरक सब्सिडी वाले नहीं हैं और जिनकी घरेलू बाजार में कमी नहीं है, उन्हें सामान्य तौर पर निर्यात की अनुमति मिलनी चाहिए। संगठन ने पूरी श्रेणी पर प्रतिबंध लगाने के बजाय एक स्पष्ट ‘नेगेटिव लिस्ट’ बनाने का सुझाव दिया। इसमें केवल उन्हीं उत्पादों को रखा जाए, जिन पर सब्सिडी, घरेलू उपलब्धता या रणनीतिक आपूर्ति के कारण निर्यात प्रतिबंध जरूरी हो।

DGFT के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कांबले ने कहा कि निर्यात मंजूरी व्यवस्था में बदलाव के लिए DGFT और कृषि मंत्रालय के बीच समन्वय जरूरी होगा। बैठक में उर्वरक निर्यातकों की जानकारी ऑनलाइन साझा करने और तय समय में मंजूरी देने के डिजिटल सिस्टम पर भी विचार किया गया।

FCO उत्पादों पर 5% GST की मांग
बैठक में GST को लेकर भी उद्योग ने अपनी मांग रखी। IMMA ने कहा कि FCO की किसी भी अनुसूची के तहत अधिसूचित सभी उत्पादों पर 5% GST होना चाहिए। उद्योग ने इनपुट पर ज्यादा GST और तैयार उत्पाद पर कम GST की स्थिति से पैदा होने वाली ‘इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर’ की समस्या भी उठाई। इसके अलावा समान या मिलते-जुलते उत्पादों पर पैक साइज या वर्गीकरण के आधार पर अलग-अलग टैक्स व्यवस्था पर भी चिंता जताई।

QR कोड से नकली उर्वरकों की पहचान
सेंट्रल फर्टिलाइजर क्वालिटी कंट्रोल एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक श्याम बाबू ने उद्योग को तकनीकी जानकारी और आंकड़ों के साथ एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कंपनियों को नकली उत्पादों की पहचान के लिए QR कोड आधारित एंटी-काउंटरफिटिंग और ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

IMMA ने बैठक के बाद डिजिटल लाइसेंसिंग, FCO सुधार, QR कोड, गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों के निर्यात, डिजिटल निर्यात मंजूरी और 5% GST सहित कई मुद्दों पर सरकार को विस्तृत प्रस्ताव देने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन