पुष्प अनुसंधान संस्थान ने फूलों की खेती को मजबूत करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फूलों की चार नई उन्नत किस्में और दो नई तकनीकें जारी की हैं। इसका मकसद किसानों तक नए शोध पहुंचाना और बेहतर किस्मों के जरिए उनकी मदद करना है। इन नई किस्मों और तकनीकों को आईसीएआर-डीएफआर पुणे के निदेशक डॉ. के. वी. प्रसाद और नागपुर स्थित राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो के निदेशक डॉ. एन. जी. पाटिल ने मिलकर जारी किया।
गुलदाउदी और ग्लेडियोलस की नई किस्में पेश
जानकारी के अनुसार, तैयार की गई चार किस्मों में गुलदाउदी की तीन किस्में शामिल हैं, जिनके नाम डीएफआर पल्लवी, डीएफआर स्वर्णा और डीएफआर मेघा हैं। इसके अलावा ग्लेडियोलस फूल की एक नई किस्म डीएफआर सोहम भी किसानों के लिए पेश की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि ये नई किस्में संस्थान के लगातार शोध का नतीजा हैं। इनसे खेतों में फूलों की पैदावार बढ़ेगी, फसल में विविधता आएगी और किसानों को बेहतर मुनाफा कमाने के नए मौके मिलेंगे।
फूलों को ताजा रखने और नए उत्पाद बनाने की तकनीक
कार्यक्रम में फूलों की सही देखभाल और उनसे नए उत्पाद बनाने के लिए दो तकनीकें भी लाई गई हैं। इनमें पहली तकनीक डीएफआर फूल शक्ति है, जो कटे हुए फूलों को लंबे समय तक ताजा रखने का काम करती है। संस्थान के अनुसार, इससे कटाई के बाद फूलदान में रखे फूल जल्दी खराब नहीं होंगे और बाजार में किसानों को उनका अच्छा दाम मिल सकेगा।
वहीं दूसरी तकनीक डीएफआर खुशबू है, जिसे सजावटी तुलसी के तेल से बनाया गया है। इसका उपयोग कार या कमरे को महकाने वाले फ्रेशनर (रूम फ्रेशनर) के रूप में किया जा सकता है। संस्थान का कहना है कि इस तरीके से सजावटी पौधों से बाजार में बिकने वाले नए उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
किसानों और नर्सरी वालों को मिलेगा सीधा फायदा
निदेशालय के अनुसार, इन नई किस्मों और तकनीकों से फूलों की खेती करने वाले किसानों, नर्सरी चलाने वालों और इस व्यापार से जुड़े लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। किसानों को रोपाई के लिए अच्छी सामग्री मिलेगी, जिससे उनकी फसल बेहतर होगी और फूलों से जुड़े नए काम-धंधे शुरू करने के रास्ते भी खुलेंगे।