खेती-बाड़ी के मोर्चे पर पिछड़े देशभर के 100 जिलों में सुधार के लिए सरकार प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना चला रही है, जिसका असर दिखना शुरू हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू और बिहार के बांका जैसे कम उत्पादकता वाले जिलों में ूबड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। साल 2025 के जुलाई में शुरू हुई इस योजना के तहत इन जिलों में सिंचाई सुविधा में विस्ता, उच्चे मूल्च वाली बागवानी फसलों की खेती और प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की उत्पादकता बढ़ाने में प्रगति हुई है।
केंद्र और राज्य की योजनाएं एक पटल पर
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना काफी खास पहल है, क्योंकि इसमें 11 मंत्रालयों की 36 और राज्यों की अलग योजनाएं शामिल हैं। दूसरी तरफ इसमें निजी क्षेत्र के सीएसआर फंड का भी उपयोग किया जा रहा है। इस योजना में कृषि मंत्रालय की 18 योजनाएं शामिल हैं, जिनमें पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
पैदावार से भंडारण तक में सुधार करने पर जोर
योजना का मुख्य उद्देश्य इन जिलों में पैदावार बढ़ाना, सिंचाई व भंडारण में सुधार करना और किसानों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराना है। जिन 100 जिलों को चुना गया है, उनमें उत्तर प्रदेश के 12, महाराष्ट्र के 9, राजस्थान के 8, मध्य प्रदेश के 8, बिहार के 7, कर्नाटक के 6, आंध्र प्रदेश के 5 और तमिलनाडु के 4 जिले शामिल हैं। इन जिलों को कम उत्पादकता और कम कृषि ऋण वितरण जैसे कारणों के आधार पर चुना गया था।
हर जिले के लिए खास योजना
अधिकारियों ने बताया कि हर जिले के लिए वहां की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता, बारिश, सिंचाई, मशीनीकरण, और भंडारण की कमी को ध्यान में रखकर खास योजनाएं बनाई गई हैं।
बारिश अच्छी पर पथरीली जमीन चुनौती, तालाबों के निर्माण से फसल विवीधीकरण
हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले को नक्सल मुक्त किया गया। यहां हर साल 1200 से 1400 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन पथरीली जमीन की वजह से मिट्टी में नमी की मौजूदगी उतनी प्रभावी नहीं है। इस चुनौती से निपटने के लिए किसान खरीफ सीजन में केवल धान और मोटे अनाज उगाते थे, जबकि रबी में खेत खाली रहते थे। अधिकारियों के अनुसार, 8 केंद्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं को मिलाकर बीते साल 3,100 से ज्यादा कृषि तालाब, रिचार्ज शाफ्ट और बांस के जरिए मेड़बंदी का काम पूरा किया गया। इससे किसान अब मक्का, रागी, सब्जियों और हल्दी जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं।
तंबाकू से उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़े किसान
आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में फसल विविधीकरण के मोर्चे पर बड़ा बदलाव आया है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में बीते वित्तीय वर्ष से किसान ने सात हजार एकड़ से ज्यादा रकबे में गांजे की खेती बंद कर दी है। इसके बजाय अब 372 हेक्टेयर में एवोकैडो, ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी जैसी कम पानी में उगने वाली महंगी बागवानी फसलें उगाई जा रही हैं। अधिकारी के अनुसार, विभिन्न योजनाओं को मिलाकर किसानों की आय बढ़ाने का काम किया गया है।
रासायनिक खाद पर निर्भरता कम और मिट्टी की सेहत सुधारने का प्लान
बिहार के बांका जिले में रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। इसके लिए मिट्टी की जांच, प्राकृतिक खेती और एक साथ दो फसलें उगाने के तरीके को बढ़ावा दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में किसान धान और मोटे अनाज की खेती करते हैं। जिला कलेक्टर कहते हैं कि अब हम विभिन्न योजनाओं के संसाधनों को मिलाकर मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए दालों की खेती शुरू कराई है।